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पंजाब के अगमपुर पुल क्षेत्र में अवैध खनन पर हाईकोर्ट सख्त, डीसी रोपड़ को दी व्यक्तिगत निगरानी की जिम्मेदारी

चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित

(High Court Takes a Strict Stand on Illegal Mining in Punjab’s Agampur Bridge Area; Assigns Personal Monitoring Responsibility to the Deputy Commissioner of Rupnagar (Ropar))पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रोपड़ जिले के अगमपुर पुल और आसपास के गांवों में अवैध खनन पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिला उपायुक्त (डीसी) रोपड़ को स्वयं क्षेत्र की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में वहां किसी भी प्रकार का अवैध खनन पाया गया तो इसके लिए डीसी रोपड़ सीधे तौर पर अदालत के प्रति जवाबदेह होंगे।

यह आदेश न्यायमूर्ति जसगुरप्रीत सिंह पुरी और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की खंडपीठ ने सतलुज नदी पर बने अगमपुर पुल के निकट चल रही डी-सिल्टिंग (गाद निकालने) गतिविधियों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया।

इससे पहले 8 जून को हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए उन गतिविधियों पर रोक लगा दी थी, जिनका उल्लेख याचिका के साथ संलग्न तस्वीरों में किया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि आनंदपुर साहिब-अगमपुर पुल के नीचे बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र की प्राकृतिक पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंच रहा है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ उपमहाधिवक्ता लविंदर सोफत ने अदालत से 8 जून के आदेश में संशोधन की मांग की थी। इसके बाद मामले की दोबारा सुनवाई की गई।

हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में राज्य सरकार अगमपुर पुल या उसके आसपास के क्षेत्रों में अवैध खनन की अनुमति नहीं दे सकती। अदालत ने यह भी नोट किया कि राज्य सरकार ने अगमपुर पुल के पास अवैध खनन से इनकार किया है, लेकिन अन्य स्थानों पर अवैध खनन के निशान मिलने और एफआईआर दर्ज होने की बात स्वीकार की है।

अदालत ने डीसी रोपड़ को निर्देश दिया कि वे व्यक्तिगत रूप से सुनिश्चित करें कि अगमपुर गांव और आसपास के क्षेत्रों में आगे कोई अवैध खनन न हो। साथ ही उन्हें अगली सुनवाई से पहले शपथपत्र और स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश भी दिए गए हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पुल की स्थिति पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि तस्वीरों से प्रतीत होता है कि गेट नंबर-1 का पिलर जर्जर हालत में है। मानसून को देखते हुए अदालत ने माना कि यदि सतलुज नदी का पूरा पानी केवल दो गेटों से गुजरेगा तो पिलर गिरने का खतरा पैदा हो सकता है।

खंडपीठ ने कहा कि बाढ़ और पुल के संभावित ढहने जैसे जोखिमों को देखते हुए गेट नंबर-1 के पिलर की मरम्मत और नवीनीकरण का कार्य किसी भी हालत में नहीं रोका जा सकता।

हाईकोर्ट ने पिलर की मरम्मत की अनुमति देते हुए 5 मई की अधिसूचना में उल्लिखित खसरा नंबरों में 30 जून तक सीमित डी-सिल्टिंग कार्य जारी रखने की मंजूरी दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि डी-सिल्टिंग केवल अगमपुर पुल से 35 से 50 मीटर अपस्ट्रीम क्षेत्र तक ही सीमित रहेगी और 30 जून के बाद बिना अदालत की अनुमति के कोई अतिरिक्त डी-सिल्टिंग नहीं की जाएगी।
इसके साथ ही राज्य सरकार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों का भी पालन करने को कहा गया है।

मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को होगी। अदालत ने डीसी रोपड़ को पुल और आसपास के क्षेत्रों का व्यक्तिगत निरीक्षण कर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

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