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बाजवा को हाईकोर्ट का झटका, जमानत खारिज!

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चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित (High Court setback for Bajwa; bail rejected!) रियल एस्टेट कारोबारी और बाजवा डेवलपर्स लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक जरनैल सिंह बाजवा...

पति ही नहीं, रिश्तेदार भी आरोपी! HC का बड़ा फैसला

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बिलासपुर। टारगेट न्यूज नेटवर्क (Not just the husband, relatives too are accused! High Court's major ruling) घरेलू हिंसा के मामलों में सिर्फ पति ही आरोपी...

नाबालिग पत्नी का तर्क खारिज, HC का बड़ा फैसला!

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नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित (Minor wife's argument rejected, HC's big decision!) दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 वर्षीय लड़की से जुड़े POCSO मामले में आरोपी को राहत...

“जन्म से पहले 10वीं? BJP प्रत्याशी के हलफनामे पर सवाल!”

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कोलकाता। टारगेट न्यूज नेटवर्क  (“10th grade before birth? Questions raised over BJP candidate’s affidavit!”) पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव से पहले BJP...

DA बकाया पर HC का शिकंजा! चीफ सेक्रेटरी तलब

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चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित (HC cracks the whip on DA arrears! Chief Secretary summoned) पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बकाया महंगाई भत्ते (DA/DR) के...

सोशल मीडिया को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र से पूछा- क्या बनेगी नीति ?

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नई दिल्ली । राजवीर दीक्षित (Delhi High Court takes a tough stance on social media; asks Centre if a policy will be formulated) लगातार स्क्रॉलिंग, अपने आप चलने वाले वीडियो, यूजर्स की पसंद के मुताबिक तैयार की गई फीड, बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन और ‘लाइक्स’ का आकर्षण—सोशल मीडिया के इन फीचर्स को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से अहम सवाल किया। दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे और जस्टिस अमित शर्मा शामिल हैं, ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से केंद्र सरकार से निर्देश लेकर यह बताने को कहा कि क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ऐसे डिजाइन फीचर्स से निपटने के लिए कोई नीति बनाने पर विचार किया जा रहा है, जो खास तौर पर युवाओं को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए तैयार किए गए होने का आरोप है। यह मामला कानून के प्रोफेसर डॉ. विकास कठूरिया की ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। याचिका में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की ऐसी तकनीक और डिजाइन को मुद्दा बनाया गया है, जिसे याचिकाकर्ता ने यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने और लत पैदा करने वाली संरचना बताया है। याचिका में इनफिनिट स्क्रॉल, ऑटोप्ले वीडियो, रील्स जैसे शॉर्ट-फॉर्म वीडियो, एल्गोरिदम से तैयार पर्सनलाइज्ड फीड, लगातार आने वाले नोटिफिकेशन और ‘लाइक्स’ जैसे एंगेजमेंट मीट्रिक्स पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इन फीचर्स को यूजर्स का ध्यान बार-बार आकर्षित करने और उन्हें प्लेटफॉर्म पर वापस लाने के लिए डिजाइन किया गया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र से सीधे पूछा कि क्या इस मुद्दे पर कोई नीति बनाने पर विचार किया जा रहा है। ASG चेतन शर्मा ने कहा कि इस सवाल पर उनके पास फिलहाल सरकार की ओर से कोई विशेष निर्देश नहीं हैं और उन्होंने जवाब देने के लिए समय मांगा। केंद्र की ओर से यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट पहले इसी तरह के कुछ मामलों पर सुनवाई से इनकार कर चुके हैं और याचिका में मांगी गई राहत मुख्य रूप से सरकार के नीतिगत क्षेत्र में आती है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस याचिका को एक प्रतिनिधित्व के तौर पर लिया जा सकता है और सरकार निर्धारित समय के भीतर इस पर विचार कर सकती है। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब नीति बनाना कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है, तो अदालत सरकार को एक निश्चित समय सीमा के भीतर नीति बनाने का निर्देश कैसे दे सकती है। इसके बजाय कोर्ट ने ASG से यह पता लगाने को कहा कि क्या केंद्र सरकार इस विषय पर किसी नीति या उपाय पर विचार कर रही है। इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ-साथ राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) को भी पक्षकार बनाया गया है। इसके अलावा Meta Platforms, Google, Snap, X और Telegram को भी मामले में शामिल किया गया है। याचिकाकर्ता ने सोशल मीडिया पर मौजूद हानिकारक कंटेंट और प्लेटफॉर्म के कथित हानिकारक डिजाइन के बीच अंतर किया है। उनका कहना है कि उनकी शिकायत किसी विशेष पोस्ट, वीडियो या कंटेंट को लेकर नहीं, बल्कि उस तकनीकी संरचना को लेकर है जो यूजर्स का ध्यान लगातार बनाए रखने के लिए इस्तेमाल की जाती है। याचिका में खास तौर पर 15 से 24 वर्ष की उम्र के युवाओं को लेकर चिंता जताई गई है। इसमें एंग्जायटी, डिप्रेशन, कम आत्मसम्मान, साइबरबुलिंग से जुड़ा तनाव और लगातार स्क्रॉलिंग जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन दावों और सोशल मीडिया के किसी विशेष फीचर तथा मानसिक स्वास्थ्य के बीच सीधे कारणात्मक संबंध को लेकर अभी हाईकोर्ट ने कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। ये फिलहाल याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दे हैं। याचिका में सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग नहीं की गई है। इसके बजाय ऐसे फीचर्स की विशेषज्ञों से जांच कराने और जरूरत पड़ने पर उचित नियम या सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की गई है। इसके लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने, सोशल मीडिया डिजाइन फीचर्स का अध्ययन करने और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर मानक तय करने की मांग की गई है। साथ ही याचिका में युवा यूजर्स को कथित नुकसान पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों से मुआवजे की मांग भी की गई है। फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को तीन सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।

हरजोत बैंस के विदेश दौरे पर हाईकोर्ट सख्त, उठे गंभीर सवाल!

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चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित  पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस के जनवरी 2024 में कथित कनाडा दौरे को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित...

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: नोटरी नहीं करा सकता शादी, ₹2 लाख जमा कराने का...

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चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित (Major High Court ruling: Notary cannot solemnize marriage; order to deposit ₹2 lakh) राजस्थान हाईकोर्ट ने नोटरी के अधिकारों को लेकर...

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बर्खास्त DSP को राहत

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चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित (Major High Court ruling; relief for dismissed DSP) गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जेल इंटरव्यू मामले में बर्खास्त किए गए पंजाब पुलिस के...

‘100% आटा’ विवाद में ITC को राहत, लाइसेंस रद्द करने पर रोक

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नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित  (Relief for ITC in ‘100% Atta’ dispute; stay on license cancellation) आशीर्वाद आटे की पैकेजिंग पर ‘100% आटा’ जैसे दावों को...

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