Home Chandigarh बिजली की रिकॉर्ड मांग के बीच पंजाब में गहराया जल संकट

बिजली की रिकॉर्ड मांग के बीच पंजाब में गहराया जल संकट

चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित

(Water Crisis Deepens in Punjab Amid Record Power Demand.)पंजाब में धान की रोपाई का सीजन चरम पर पहुंचने के साथ ही बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है, जबकि बिजली उत्पादन क्षमता पर भी दबाव बढ़ गया है। मानसून की बारिश में देरी के कारण किसानों को सिंचाई के लिए ट्यूबवेलों पर अधिक निर्भर होना पड़ रहा है, जिससे बिजली और भूजल दोनों पर भारी दबाव पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, किसानों को धान की फसल की सिंचाई के लिए प्रतिदिन लगभग आठ घंटे बिजली की आवश्यकता होती है। बारिश नहीं होने के कारण अधिकांश किसान ट्यूबवेलों के जरिए खेतों में पानी पहुंचा रहे हैं, जिससे राज्य में बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है।

वर्तमान में पंजाब के सरकारी थर्मल प्लांटों से केवल लगभग 600 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जबकि निजी बिजली उत्पादक करीब 3,000 मेगावाट बिजली उपलब्ध करा रहे हैं। इसके अलावा पंजाब नॉर्दर्न ग्रिड से लगभग 10,560 मेगावाट बिजली प्राप्त कर रहा है।

साप्ताहिक अवकाश के कारण औद्योगिक मांग कम होने के बावजूद राज्य का अधिकतम बिजली लोड 15,560 मेगावाट तक पहुंच गया। अधिकारियों का कहना है कि मानसून में देरी ने किसानों की भूजल पर निर्भरता और बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, एक ट्यूबवेल औसतन आठ घंटे बिजली मिलने पर सप्ताह में लगभग 30.24 लाख लीटर पानी जमीन से निकालता है। पंजाब में मौजूद करीब 14 लाख ट्यूबवेल धान सीजन के दौरान हर सप्ताह लगभग 4,385 अरब लीटर भूजल का दोहन कर रहे हैं, जो भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

राज्य में सबसे अधिक 1.17 लाख ट्यूबवेल लुधियाना जिले में हैं। इसके बाद गुरदासपुर (99,581), अमृतसर (93,946) और संगरूर (93,669) का स्थान है। इन जिलों में पिछले वर्षों के दौरान भूजल स्तर में सबसे अधिक गिरावट भी दर्ज की गई है।

उधर, थर्मल प्लांटों में तकनीकी और संचालन संबंधी समस्याओं के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट की सभी चार यूनिटों सहित राज्य क्षेत्र की कुल छह यूनिटें फिलहाल बंद हैं। हालांकि रंजीत सागर परियोजना की चारों यूनिटें चालू हैं और लगभग 565 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रही हैं।

पीएसपीसीएल के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल बिजली आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है और बंद पड़ी कुछ यूनिटों को अगले 24 घंटों के भीतर दोबारा शुरू किए जाने की उम्मीद है।

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