Home Khas Khaber नौकरी नहीं मिली तो बनीं बैंक सखी, अब ₹16,500 महीना कमाई

नौकरी नहीं मिली तो बनीं बैंक सखी, अब ₹16,500 महीना कमाई

मेरठ। टारगेट न्यूज नेटवर्क 

(Became a ‘Bank Sakhi’ after failing to find a job; now earns ₹16,500 a month) आर्थिक तंगी और नौकरी न मिलने के बीच मेरठ के माछरा ब्लॉक के अलीपुर आलमपुर गांव की पूनम गिरि ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी। आज वह बैंक सखी के रूप में काम कर रही हैं और बैंकिंग सेवाओं से महिलाओं को जोड़ने के साथ करीब ₹16,500 की मासिक आय कमा रही हैं।

आमसभा से शुरू हुआ बदलाव

पूनम ने पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश की, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें रोजगार नहीं मिल सका। शादी के बाद भी पति की मजदूरी अनियमित थी और बटाई की जमीन से होने वाली कमाई से परिवार का गुजारा मुश्किल था।

गांव में ग्राम विकास अधिकारी और ब्लॉक मिशन मैनेजर की ओर से आयोजित आमसभा में उन्हें स्वयं सहायता समूहों के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद पूनम हनुमान स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और नियमित बचत व बैठकों में हिस्सा लेने लगीं।

जिम्मेदारी मिली तो बनीं बैंक सखी

पूनम की सक्रियता और शैक्षिक योग्यता को देखते हुए उन्हें समूह और ग्राम संगठन में जिम्मेदारियां मिलने लगीं। बाद में सीएलएफ की ओर से उनका चयन बैंक सखी के रूप में किया गया।

बैंक सखी बनने के बाद उन्होंने गांव की महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ना शुरू किया। अब तक वह करीब 90 स्वयं सहायता समूहों के खाते खुलवाने में मदद कर चुकी हैं, जबकि 150 से 200 महिलाओं के व्यक्तिगत बैंक खाते भी खुलवाए गए हैं।

60 समूहों को CCL से जोड़ा

पूनम ने करीब 60 स्वयं सहायता समूहों को CCL से जोड़ने में भी भूमिका निभाई। इससे समूहों को आजीविका और रोजगार से जुड़े कामों के लिए ऋण हासिल करने का रास्ता मिला। उनके काम के लिए उन्हें ब्लॉक और जनपद स्तर पर सम्मान भी मिल चुका है।

बैंक सखी के साथ डेयरी से भी कमाई

समूह से जुड़ने से पहले पूनम की अपनी कोई नियमित आय नहीं थी। अब बैंक सखी के काम और दूध की डेयरी से उनकी मासिक आय करीब ₹16,500 तक पहुंच गई है। उनके पति की आय भी अब करीब ₹4,500 बताई गई है।

परिवार ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से अलग-अलग जरूरतों के लिए ऋण भी लिया। बच्चे के इलाज के लिए ₹24 हजार, खेती और पशु शेड के लिए ₹2.40 लाख तथा दो भैंस खरीदने के लिए ₹1.80 लाख का ऋण लिया गया।

अब दूसरी महिलाओं के लिए बनीं सहारा

पूनम अब महिलाओं को सिर्फ बैंकिंग सेवाओं से ही नहीं जोड़ रहीं, बल्कि उन्हें सरकारी योजनाओं और बीमा सुविधाओं की जानकारी भी दे रही हैं। उन्होंने महिलाओं को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) से जोड़ने में भी सहयोग किया।

पूनम का कहना है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक मदद के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ी। उनके मुताबिक, समूह ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिया और अब वह दूसरी महिलाओं को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद कर रही हैं।

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