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500 करोड़ के क्रिप्टो घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, हिमाचल-पंजाब कनेक्शन की जांच तेज, एक आरोपी गिरफ्तार

शिमला । राजवीर दीक्षित

(ED Takes Major Action in ₹500 Crore Crypto Scam; Probe Into Himachal-Punjab Connection Intensifies, One Accused Arrested.)प्रवर्तन निदेशालय (ED) के शिमला कार्यालय ने सोमवार को करीब 500 करोड़ रुपये के बहुचर्चित क्रिप्टोकरेंसी घोटाले की जांच के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए विजय जुनेजा और मासूम जुनेजा के ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17(1) के तहत की गई। तलाशी के दौरान ईडी को मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद हुए हैं।

ईडी के अनुसार, निवेशकों से जुटाई गई रकम विजय कुमार जुनेजा और मासूम जुनेजा तक पहुंचाई जाती थी। आरोप है कि नकदी मिलने के बाद इन पैसों का इस्तेमाल अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया। इन संपत्तियों की रजिस्ट्री में दर्शाई गई कीमत वास्तविक भुगतान से काफी कम दिखाई गई, जिससे बड़ी मात्रा में नकद लेनदेन किया जा सका और अवैध रूप से अर्जित धन को वैध दिखाने की कोशिश की गई।

जांच के दौरान PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों में कई लोगों ने बताया कि घोटाले के कथित मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा की ओर से विजय और मासूम को नकदी सौंपी जाती थी।

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि विजय और मासूम कई ऐसे बैंक खातों के नामित (Nominee) थे, जो कर्मचारियों के नाम पर खोले गए थे। इससे संकेत मिलता है कि इन खातों पर उनका प्रभावी नियंत्रण था। जांच एजेंसी का दावा है कि इन खातों का इस्तेमाल अवैध धन को अलग-अलग स्तरों पर घुमाकर उसकी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए किया जाता था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी ने मासूम जुनेजा को PMLA की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार कर लिया है। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस क्रिप्टो घोटाले से कुल कितनी अवैध कमाई हुई और उसे किस प्रकार विभिन्न माध्यमों से सिस्टम में शामिल किया गया।

यह मामला उस बड़े क्रिप्टोकरेंसी घोटाले से जुड़ा है, जिसकी जांच ईडी ने हिमाचल प्रदेश और पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। एफआईआर में सुभाष शर्मा समेत कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।

जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2018 में सुभाष शर्मा ने हेम राज, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक शर्मा और राधिका शर्मा के साथ मिलकर एक क्रिप्टोकरेंसी आधारित मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) योजना शुरू की थी। इसके लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाया गया, जिसके माध्यम से बड़ी संख्या में निवेशकों को जोड़ा गया।

बाद में इस प्लेटफॉर्म को विदेशी सर्वरों पर स्थानांतरित कर दिया गया और korvio.io तथा voscrow.com जैसे डोमेन के जरिए इसका संचालन किया गया।

आरोप है कि लोगों को “कोर्वियो कॉइन (KRO)” में निवेश करने के लिए बड़े मुनाफे का लालच दिया गया। इसके लिए भ्रामक सेमिनार आयोजित किए गए, टोकन की कीमतों में हेरफेर किया गया और नए टोकन लॉन्च किए गए। यह पूरी योजना कथित तौर पर पोंजी स्कीम की तरह काम कर रही थी, जिसमें नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को रिटर्न दिया जाता था।

घोटाले को छिपाने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड और डोमेन भी डिलीट कर दिए गए थे। हालांकि जांच एजेंसियों द्वारा बरामद किए गए डेटा से पता चला कि 2.48 लाख से अधिक लोग इस धोखाधड़ी का शिकार हुए और कुल लेनदेन 219 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का था। निवेशकों को लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

ईडी का कहना है कि आरोपियों ने बड़ी संख्या में बैंक खातों, फर्जी कंपनियों और बिचौलियों के जरिए धन को कई स्तरों पर घुमाया। साथ ही अवैध कमाई के एक हिस्से को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर उसकी ट्रैकिंग और ऑडिट ट्रेल को छिपाने की कोशिश की गई।

घोटाले का खुलासा होने के बाद मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा कथित तौर पर गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए दुबई फरार हो गया, जिसकी तलाश जारी है।

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