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कम DA के बावजूद पंजाब के कर्मचारियों का वेतन केंद्र से अधिक, सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद दी सफाई

चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित

(Punjab Govt Defends Employee Pay Structure, Says State Staff Earn More Than Central Employees Despite Lower DA) पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा लंबित महंगाई भत्ता (DA) का भुगतान करने के निर्देश दिए जाने के बाद पंजाब सरकार ने अपनी वेतन नीति का बचाव करते हुए बड़ा दावा किया है। सरकार का कहना है कि राज्य के अधिकांश कर्मचारियों को केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में पहले से ही अधिक वेतन मिल रहा है। इसलिए केवल केंद्रीय दर के अनुसार महंगाई भत्ता लागू करना व्यावहारिक और वित्तीय रूप से उचित नहीं होगा।

सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पंजाब में कई कर्मचारी वर्गों का मूल वेतन और वेतनमान केंद्र सरकार की तुलना में 30 से 70 प्रतिशत तक अधिक है। हालांकि वर्तमान में पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों को 42 प्रतिशत महंगाई भत्ता दे रही है, जबकि केंद्र सरकार 60 प्रतिशत DA दे रही है, लेकिन इसके बावजूद राज्य कर्मचारियों का कुल मासिक वेतन कई मामलों में केंद्रीय कर्मचारियों से अधिक है।

सरकार ने उदाहरण देते हुए बताया कि पंजाब में कार्यरत एक क्लर्क को कुल 54,812 रुपये मासिक वेतन मिलता है, जबकि केंद्र सरकार में इसी पद पर कार्यरत कर्मचारी को 36,960 रुपये मिलते हैं। इसी प्रकार पंजाब का एक ड्राइवर 40,612 रुपये मासिक वेतन प्राप्त करता है, जबकि केंद्र सरकार में समान पद पर वेतन 36,960 रुपये है। सरकार का कहना है कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य का वेतन ढांचा पहले से ही अधिक लाभकारी है।

सरकार ने यह भी दोहराया कि वह इस बात के पक्ष में है कि किसी भी कर्मचारी का कुल वेतन केंद्र सरकार के वेतनमान और वहां लागू महंगाई भत्ते से कम नहीं होना चाहिए। लेकिन पंजाब के उच्च वेतनमान पर केंद्र सरकार की अधिक DA दर लागू करना उचित नहीं है, क्योंकि दोनों वेतन प्रणालियां अलग-अलग आधार पर तैयार की गई हैं और इन्हें एक साथ जोड़ना संभव नहीं है।

राज्य सरकार ने यह भी कहा कि महंगाई भत्ते की दर तय करना राज्य का नीतिगत और संप्रभु अधिकार है। सरकार के अनुसार पंजाब पहले ही देश के प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक वेतन और पेंशन का वित्तीय बोझ उठा रहा है। यदि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार अतिरिक्त DA का भुगतान किया जाता है, तो राज्य के खजाने पर भारी आर्थिक दबाव पड़ेगा, जिससे विकास परियोजनाओं और पूंजीगत खर्च के लिए उपलब्ध संसाधन प्रभावित हो सकते हैं।

फिलहाल इस मुद्दे पर कर्मचारियों, सरकार और अदालत के बीच चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में सरकार की अगली कार्रवाई और हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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