चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“1,200 Veterinary Inspectors Protest in Punjab, March Towards CM Residence Over Pending Demands “) पंजाब में करीब 1,200 पशु चिकित्सा निरीक्षकों (Veterinary Inspectors) ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। पंजाब स्टेट वेटरनरी इंस्पेक्टर्स एसोसिएशन के आह्वान पर राज्यभर से पहुंचे निरीक्षक मोहाली स्थित लाइव स्टॉक कॉम्प्लेक्स के बाहर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने पहले पशुपालन विभाग के निदेशक कार्यालय के बाहर धरना दिया और बाद में अपनी मांगों के समर्थन में मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च शुरू किया। हालांकि, चंडीगढ़ में प्रवेश करने के दौरान पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में रोक दिया।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष गुरदीप सिंह बस्सी और महासचिव विपिन कुमार गोयल ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और पशुपालन विभाग का प्रशासनिक तंत्र जानबूझकर उनकी मांगों को लंबित रखे हुए है। उनका कहना है कि कई दौर की बैठकों और आश्वासनों के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
प्रदर्शनकारी निरीक्षकों की प्रमुख मांगों में स्पष्ट प्रमोशन नीति, वेतनमान संबंधी त्रुटियों का सुधार, नए भर्ती कर्मचारियों को उचित वेतन, रजिस्टर्ड वेटरनरी इंस्पेक्टर काउंसिल का गठन, 2011 में भर्ती निरीक्षकों की 18 माह की सेवा को मान्यता तथा जिला वेटरनरी इंस्पेक्टर्स के अधिकारों की बहाली शामिल हैं।
एसोसिएशन के नेताओं ने कहा कि कैबिनेट सब-कमेटी उनकी मांगों पर सहमति जता चुकी है, लेकिन वित्त और कार्मिक विभाग लगातार आपत्तियां लगाकर प्रक्रिया में देरी कर रहे हैं। उन्होंने सरकार पर कर्मचारी विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन और तेज किया जाएगा।
इस प्रदर्शन में राज्यभर के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और सैकड़ों निरीक्षक शामिल हुए, जिससे यह आंदोलन पंजाब के पशुपालन विभाग के सबसे बड़े कर्मचारी आंदोलनों में से एक बन गया। अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम और संभावित वार्ता पर टिकी हुई है।



















