Home Chandigarh नई सड़क खोदने के मामले में मानवाधिकार आयोग सख्त

नई सड़क खोदने के मामले में मानवाधिकार आयोग सख्त

चंडीगढ़ । राजवीर दीक्षित

(Human Rights Commission Seeks Report Over Road Digging Row) लुधियाना में खराब शहरी नियोजन और हाल ही में बनाई गई सड़क को कुछ ही महीनों बाद पानी की पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदे जाने के मामले में पंजाब राज्य एवं चंडीगढ़ (यूटी) मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने नगर निगम लुधियाना के कमिश्नर और डिप्टी कमिश्नर लुधियाना से इस मामले में अलग-अलग रिपोर्ट तलब की है। दोनों अधिकारियों को अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले अपनी रिपोर्ट आयोग के समक्ष दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर 2026 को होगी।

यह शिकायत शहर के सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद शर्मा की ओर से दायर की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सग्गू चौक से हम्ब्रां रोड तक सड़क का निर्माण हाल ही में करीब 1.52 करोड़ रुपये की लागत से करवाया गया था। अब इसी सड़क को 24 घंटे जलापूर्ति योजना के तहत पानी की पाइपलाइन बिछाने के लिए दोबारा खोदे जाने का प्रस्ताव है।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि नगर निगम और जल प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों के बीच उचित तालमेल नहीं होने के कारण सरकारी धन से तैयार की गई नई सड़क को नुकसान पहुंचने की स्थिति पैदा हो गई है। शिकायत में यह भी सवाल उठाया गया कि यदि सड़क के नीचे या आसपास भविष्य में पाइपलाइन बिछाने की योजना पहले से थी, तो सड़क निर्माण से पहले विभागों के बीच समन्वय क्यों नहीं किया गया।

मामले में शहर की अन्य सड़कों की खराब हालत का मुद्दा भी उठाया गया। शिकायत के अनुसार, लुधियाना के कई इलाकों में सड़कें क्षतिग्रस्त हैं और जगह-जगह टूटे हिस्सों के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खराब सड़कों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने और आम लोगों की सुरक्षा प्रभावित होने का भी आरोप लगाया गया।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि खराब शहरी नियोजन से जुड़े आरोप प्रथम दृष्टया लोगों के मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला प्रतीत होते हैं। इसी आधार पर आयोग ने नगर निगम कमिश्नर और डिप्टी कमिश्नर से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।

अब अधिकारियों की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क को दोबारा खोदने की आवश्यकता क्यों पड़ी और संबंधित विभागों के बीच योजना एवं समन्वय में कहां कमी रही। इस मामले पर 1 सितंबर की सुनवाई में आयोग के समक्ष आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।

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