शिमला । राजवीर दीक्षित
(BJP captures Shimla Zila Parishad; Bhupendra Sisodia becomes Chairman and Bharat Kalanta Vice Chairman)शिमला जिला परिषद चुनाव का परिणाम भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि के रूप में सामने आया है। भाजपा समर्थित भूपेंद्र सिंह सिसोदिया ने 13 वोट हासिल कर अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की, जबकि भरत सिंह कलांटा 14 मतों के साथ उपाध्यक्ष चुने गए। अध्यक्ष पद पर भाजपा की जीत का अंतर महज एक वोट रहा, जिससे मुकाबले की नजदीकी का अंदाजा लगाया जा सकता है। खास बात यह है कि भाजपा ने 26 साल के लंबे अंतराल के बाद शिमला जिला परिषद में अपना अध्यक्ष बनाकर इतिहास रच दिया है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ी और कई दिनों से चल रही राजनीतिक हलचल के बीच आखिरकार नए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव हो गया। इस जीत को भाजपा की संगठनात्मक मजबूती और शिमला की जिला राजनीति में बदलते समीकरणों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
जिला परिषद के गठन के करीब तीन महीने 10 दिन बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव हुआ है। लंबे समय से दोनों प्रमुख दल सदस्यों को अपने पक्ष में करने के लिए रणनीति बनाने में जुटे रहे।
13 के आंकड़े पर टिकी थी जिला परिषद की सत्ता
जिला परिषद चुनाव में भाजपा के 11, कांग्रेस के 10 और चार निर्दलीय सदस्य चुने गए थे। जिला परिषद में बहुमत का आंकड़ा 13 था। ऐसे में किसी भी दल के लिए सत्ता तक पहुंचने के लिए निर्दलीय सदस्यों का समर्थन बेहद अहम हो गया था। चारों निर्दलीय सदस्य चुनाव में किंगमेकर की भूमिका में नजर आ रहे थे
शिमला जिला परिषद में बदला सियासी समीकरण
शिमला जिला परिषद के चुनाव में भाजपा ने बड़ा उलटफेर करते हुए सत्ता अपने नाम कर ली। निर्दलीय सदस्यों के समर्थन से भाजपा बहुमत जुटाने में सफल रही। भूपेंद्र सिंह सिसोदिया को अध्यक्ष और भरत सिंह कलांटा को उपाध्यक्ष चुना गया। पहली बार जिला परिषद की कमान भाजपा समर्थित नेतृत्व के हाथों में आने से स्थानीय राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत हैं।
शिमला जिला परिषद चुनाव में आमने-सामने भाजपा-कांग्रेस के बड़े नेता
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर शिमला में सियासी पारा चढ़ गया है। भाजपा खेमे में राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन, सिकंदर कुमार और विधायक बलवीर वर्मा सक्रिय नजर आए। वहीं कांग्रेस की तरफ से पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और सहकारी बैंक के चेयरमैन देवेंद्र श्याम ने मोर्चा संभाला। दोनों पक्षों के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने चुनाव की अहमियत और बढ़ा दी है।
एक वोट ने तय किया सत्ता का समीकरण
25 सदस्यों वाली जिला परिषद में भाजपा और कांग्रेस के बीच समर्थन को लेकर कांटे की टक्कर थी। भाजपा का दावा था कि उसके साथ 13 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस 12 सदस्यों के समर्थन की बात कर रही थी। ऐसे में एक सदस्य का समर्थन भी पूरे समीकरण को बदल सकता था। आखिरकार भाजपा अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में सफल रही और अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की कुर्सी पर अपना कब्जा जमाने में कामयाब हुई।



















