शिमला । राजवीर दीक्षित
(All eyes on the Shimla Zila Parishad Chairperson and Vice-Chairperson election; BJP and Congress leaders have arrived)शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। भाजपा समर्थित सदस्य पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बचत भवन पहुंचे। हिमाचल हाई कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। इससे पहले चुनाव में देरी को लेकर मामला अदालत में पहुंचा था। जिला परिषद के गठन के लगभग तीन महीने बाद होने वाले चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस लंबे समय से रणनीति बनाने में जुटे हैं। बुधवार को भाजपा ने अपने सदस्यों के साथ बैठक कर चुनावी रणनीति पर चर्चा की और पर्याप्त समर्थन होने का दावा किया।
एक ही मंच पर दिखी भाजपा-कांग्रेस की सक्रियता
मौके पर भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के प्रमुख चेहरे सक्रिय नजर आए। भाजपा से राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन, सिकंदर कुमार और विधायक बलवीर वर्मा पहुंचे, जबकि कांग्रेस की ओर से पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और सहकारी बैंक चेयरमैन देवेंद्र श्याम ने उपस्थिति दर्ज कराई।
अध्यक्ष की कुर्सी पर फंसा पेच, भाजपा के 13 तो कांग्रेस के 12 समर्थक होने का दावा
जिला परिषद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। भाजपा ने 13 सदस्यों का समर्थन जुटाने का दावा किया है, जबकि कांग्रेस 12 सदस्यों को अपने साथ बता रही है। भाजपा के 11 निर्वाचित सदस्यों के साथ दो निर्दलीयों के समर्थन की चर्चा है। दूसरी ओर कांग्रेस के 10 निर्वाचित सदस्यों के साथ दो निर्दलीय सदस्यों के होने का दावा सामने आया है। भाजपा ने देर शाम बैठक कर चुनावी रणनीति पर चर्चा की।
भाजपा की नजर इतिहास पर, कांग्रेस के गढ़ में सियासी मुकाबला
भाजपा के लिए यह चुनाव शिमला जिले की राजनीति में नया इतिहास लिखने का बड़ा अवसर बनकर सामने आया है। वहीं कांग्रेस के सामने अपने मजबूत राजनीतिक आधार को बचाए रखने की चुनौती है। चुनाव से पहले भाजपा नेताओं ने सभी सदस्यों के साथ बैठक कर रणनीति पर मंथन किया। पार्टी का दावा है कि उसके पास पर्याप्त समर्थन है और अध्यक्ष व उपाध्यक्ष दोनों पदों पर जीत दर्ज की जाएगी।
शिमला में कांग्रेस के सामने सियासी गढ़ बचाने की चुनौती
शिमला जिला परिषद पर लंबे समय से कांग्रेस का दबदबा रहा है। ऐसे में अगर भाजपा इस बार जिला परिषद की सत्ता हासिल करने में कामयाब होती है, तो इसे जिला की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जाएगा। कांग्रेस के सामने अब अपने समर्थक सदस्यों को एकजुट रखने और भाजपा की रणनीति को नाकाम करने की चुनौती है।



















