रूपनगर। राजवीर दीक्षित
(MLA Dinesh Chadha’s commendable initiative to save the Sutlej from pollution) पंजाब की सतलुज नदी को दूसरे राज्यों से आ रहे औद्योगिक प्रदूषण से बचाने के लिए विधानसभा क्षेत्र रूपनगर के विधायक दिनेश चड्ढा द्वारा उठाई गई आवाज अब एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) तक पहुंच गई है। सिरसा नदी के प्रदूषण और इसके निचले बहाव के माध्यम से रूपनगर में सतलुज नदी पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर विधायक दिनेश चड्ढा द्वारा दायर मूल आवेदन संख्या 527/2026 पर सुनवाई करते हुए एनजीटी के प्रिंसिपल बेंच ने संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
9 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान चेयरपर्सन माननीय जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की बेंच ने मामले को पर्यावरण संबंधी नियमों के अनुपालन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने के आदेश दिए। मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर 2026 को होगी।
विधायक दिनेश चड्ढा द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र में मौजूद फार्मास्यूटिकल और अन्य औद्योगिक इकाइयों द्वारा बिना उपचार या आंशिक रूप से उपचारित गंदा पानी ड्रेनेज चैनलों, सहायक नदियों और सिरसा नदी में छोड़ा जा रहा है। इसके कारण नदी के पानी में दुर्गंध आने और पानी के प्रदूषित होने का मुद्दा भी याचिका में उठाया गया है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि सीवेज और ठोस कचरा प्राकृतिक जल प्रवाह में डाला जा रहा है, जिसका प्रभाव आगे चलकर सतलुज नदी पर पड़ रहा है। इसके अलावा बद्दी क्षेत्र में स्थित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की क्षमता अपर्याप्त होने का मुद्दा भी उठाया गया है।
विधायक द्वारा इन आरोपों के समर्थन में तस्वीरें और विभिन्न समाचार रिपोर्ट भी अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की गईं। एनजीटी ने अपने आदेश में दर्ज किया कि मूल आवेदन में पर्यावरण संबंधी नियमों के अनुपालन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया है।
विधायक दिनेश चड्ढा ने कहा कि सतलुज नदी पंजाब की जीवन रेखा है और किसी भी दूसरे राज्य द्वारा इसमें प्रदूषित पानी या औद्योगिक कचरा डालना बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल नदी के पानी का नहीं, बल्कि पंजाब के लोगों के स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि एनजीटी द्वारा नोटिस जारी करना इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम है। दिनेश चड्ढा ने कहा कि जब तक सिरसा नदी के माध्यम से सतलुज में पहुंच रहे प्रदूषण का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक वह इस मुद्दे को पूरी गंभीरता से उठाते रहेंगे और पंजाब के हितों के लिए हिमाचल और हरियाणा सरकारों के साथ लड़ाई जारी रखेंगे।
एनजीटी ने विधायक को प्रतिवादियों को नोटिस की तामील करवाने और अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने के निर्देश भी दिए हैं।



















