ऊना । राजवीर दीक्षित
(Rising debt on Himachal; BJP claims government has mortgaged public assets) हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ बीजेपी ने आर्थिक मोर्चे पर मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी के राज्य सचिव सुमित शर्मा ने आरोप लगाया है कि सरकार भारी-भरकम कर्ज लेने के लिए सरकारी संपत्तियों को गिरवी रख रही है। शर्मा का कहना है कि लगातार लिए जा रहे लोन ने प्रदेश को आर्थिक संकट की स्थिति में पहुंचा दिया है।
ऊना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुमित शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के उस सार्वजनिक बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में सरकार की ओर से 35,555 करोड़ रुपये का लोन लिए जाने की बात कही थी।
एक तरफ बढ़ता कर्ज, दूसरी तरफ सरकारी संपत्तियां गिरवी रखने का आरोप।
बीजेपी का सवाल है कि आखिर प्रदेश की अर्थव्यवस्था किस दिशा में जा रही है? शर्मा ने इसी मुद्दे को आधार बनाकर कांग्रेस सरकार की वित्तीय नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
बीजेपी नेता ने हिमाचल सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए राज्य की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका दावा है कि हिमाचल पर कुल कर्ज़ का बोझ 1.1 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा राज्य के सालाना बजट के करीब दोगुने के बराबर है। बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के चलते हिमाचल लगातार बढ़ते कर्ज़ के जाल में फंसता जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले समय में इस आर्थिक संकट से बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो सकता है।
शर्मा ने सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में कथित गिरावट को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों से किए गए वादों के मुताबिक अब तक दूध और गोबर की खरीद नहीं की जा रही है, जिसके चलते किसानों में निराशा बढ़ रही है। उनका कहना है कि किसानों को उम्मीद थी कि इन योजनाओं से उन्हें आर्थिक सहारा मिलेगा, लेकिन जमीनी स्तर पर उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पा रहा।
शर्मा ने दावा किया कि सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि आम लोगों से जुड़ी सरकारी सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों, कॉलेजों और स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा लोक निर्माण विभाग तथा जल शक्ति विभाग के कई सरकारी कार्यालयों को बंद कर दिया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इन संस्थानों के बंद होने का सीधा असर आम जनता और ग्रामीण क्षेत्रों पर कितना पड़ रहा है।
उन्होंने सड़कों की खराब हालत को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। शर्मा के मुताबिक, एक तरफ सड़कों की स्थिति लगातार खराब हो रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी अस्पतालों में मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पहले सरकारी अस्पतालों में रजिस्ट्रेशन स्लिप मुफ्त मिलती थी, लेकिन अब मरीजों से इसके लिए 10 रुपये लिए जा रहे हैं।



















