Home Himachal Pradesh हिमाचल में ऐतिहासिक मौका! IIAS के 60 साल पूरे होने पर होगा...

हिमाचल में ऐतिहासिक मौका! IIAS के 60 साल पूरे होने पर होगा भव्य आयोजन

शिमला । राजवीर दीक्षित

(A historic occasion in Himachal! Grand event to mark the completion of 60 years of IIAS) शिमला स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी (IIAS), राष्ट्रपति निवास अपनी डायमंड जुबली के अवसर पर 11 से 15 अक्टूबर तक विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित करने जा रहा है। पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में किताबों, स्कॉलरशिप, कला, इतिहास, विरासत और समकालीन बौद्धिक चर्चाओं को एक साझा मंच पर लाया जाएगा। यह आयोजन IIAS की छह दशकों की बौद्धिक और सांस्कृतिक यात्रा को सामने रखने के साथ-साथ वर्तमान समय में संस्थान की भूमिका और प्रासंगिकता पर भी केंद्रित रहेगा।

IIAS के निदेशक प्रोफेसर हिमांशु चतुर्वेदी ने कहा कि संस्थान का डायमंड जुबली सप्ताह उसकी समृद्ध विरासत और आज के समय में उसकी अहमियत के बीच एक पुल की तरह काम करेगा। उनके मुताबिक, यह सिर्फ संस्थान के लंबे सफर को याद करने और उसकी उपलब्धियों का जश्न मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि समाज के लिए IIAS के बौद्धिक और सांस्कृतिक दायरे को और अधिक व्यापक बनाने का भी महत्वपूर्ण मौका है।

प्रोफेसर चतुर्वेदी ने इस बात पर जोर दिया कि डायमंड जुबली का उद्देश्य केवल अतीत को याद करना नहीं है। यह उस लगातार जारी भूमिका का उत्सव भी है, जिसे IIAS उन्नत शोध, विचार-विमर्श और मानव एवं समाज से जुड़े गहरे महत्व वाले विषयों पर चिंतन के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में निभाता आ रहा है। संस्थान ने वर्षों से देश के बौद्धिक और सांस्कृतिक विमर्श में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और यह आयोजन उसी विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

15 अक्टूबर को होने वाला समापन समारोह डायमंड जुबली सप्ताह का प्रमुख आकर्षण रहेगा। इस समारोह में गवर्नर कविंदर गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। आयोजन को केवल अकादमिक समुदाय तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, कला प्रेमियों, पाठकों, पर्यटकों और आम जनता को भी हिस्सा लेने और देश की विविध बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

इस दौरान लोगों को विचारों, किताबों, शोध, कलात्मक अभिव्यक्तियों और भारतीय संस्कृति की विविध परंपराओं को करीब से समझने का मौका मिलेगा। इस लिहाज से डायमंड जुबली सप्ताह केवल एक संस्थागत समारोह नहीं, बल्कि ज्ञान, कला और विरासत को आम लोगों तक पहुंचाने वाला व्यापक सांस्कृतिक आयोजन भी होगा।

शैक्षणिक कार्यक्रमों की शुरुआत 11 अक्टूबर को होगी। इस दिन भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद यानी ICHR, नई दिल्ली के अध्यक्ष और पद्म श्री से सम्मानित प्रोफेसर राघवेंद्र तंवर विशेष व्याख्यान देंगे। उनके व्याख्यान का विषय होगा— “जम्मू कश्मीर, लद्दाख युगों से: ऐतिहासिकता के मुद्दों और घटनाओं का अवलोकन।” इस व्याख्यान में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के इतिहास, उसकी ऐतिहासिकता से जुड़े विभिन्न पहलुओं और महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

इसके बाद 12 अक्टूबर को प्रसिद्ध पुरातत्वविद् और पुणे स्थित डेक्कन कॉलेज पोस्ट-ग्रेजुएट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के पूर्व कुलपति प्रोफेसर वसंत शिंदे अपने विचार रखेंगे। उनका व्याख्यान “भारतीय ज्ञान प्रणाली का विकास: राखीगढ़ी के विशेष संदर्भ में पुरातात्विक परिप्रेक्ष्य” विषय पर होगा। इस दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास को पुरातात्विक साक्ष्यों और राखीगढ़ी के विशेष संदर्भ के माध्यम से समझने का प्रयास किया जाएगा।

13 अक्टूबर को ग्रामीण विकास मंत्रालय, नई दिल्ली के ICAS अधिकारी अखिलेश झा “वंदे मातरम” विषय पर विशेष व्याख्यान देंगे। यह कार्यक्रम भारतीय इतिहास और राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने का अवसर प्रदान करेगा।

इसी दिन डायमंड जुबली आयोजन में एक विशेष आर्ट गैलरी का भी उद्घाटन किया जाएगा। इस गैलरी में उन कलाकारों की कलाकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी, जिन्होंने IIAS में आयोजित आर्ट कैंप में हिस्सा लिया था। इस आर्ट कैंप का विषय था— “कांगड़ा मिनिएचर्स में लोक और ग्रामीण चित्रण: एक स्वदेशी भारतीय कला परिप्रेक्ष्य।”

इस प्रदर्शनी के जरिए कांगड़ा मिनिएचर कला में लोक जीवन और ग्रामीण परिवेश के चित्रण को सामने लाया जाएगा। कलाकारों की रचनाओं के माध्यम से भारतीय कला की स्थानीय परंपराओं, ग्रामीण जीवन और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

कुल मिलाकर, 11 से 15 अक्टूबर तक राष्ट्रपति निवास स्थित IIAS में होने वाला डायमंड जुबली सप्ताह इतिहास, शोध, किताबों, कला, संस्कृति और आधुनिक बौद्धिक संवाद का एक व्यापक मंच बनेगा। एक ओर जहां यह संस्थान की छह दशक लंबी यात्रा और विरासत को रेखांकित करेगा, वहीं दूसरी ओर छात्रों, शोधकर्ताओं, कलाकारों और आम जनता को भारत की विविध ज्ञान एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी देगा।

यानी IIAS की डायमंड जुबली सिर्फ बीते 60 वर्षों को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि ज्ञान और विचारों की उस यात्रा को आगे बढ़ाने का मंच है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी नई दिशा तय कर सकती है।

Translate »
error: Content is protected !!