मनाली । राजवीर दीक्षित
(President Murmu visits Atal Tunnel; hails BRO’s work as ‘world-class engineering’) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बुधवार सुबह हिमाचल प्रदेश के मनाली पहुंचने के बाद अटल टनल रोहतांग का दौरा करने पहुंचीं। मनाली की पहाड़ियों पर हो रही बर्फबारी और ठंडी हवाओं के बीच राष्ट्रपति लॉन्ग वूलन कोट पहनकर अटल टनल पहुंचीं। टनल के छोर पर पहुंचकर उन्होंने कुछ देर रुककर बर्फ से ढकी पहाड़ियों और आसपास के खूबसूरत नजारों को निहारा। राष्ट्रपति ने यहां फोटो भी खिंचवाए और सीमा सड़क संगठन यानी BRO के अधिकारियों से अटल टनल के निर्माण, तकनीकी खूबियों और इसके महत्व के बारे में जानकारी ली।
बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियां, चारों तरफ छाई धुंध और बीच में खड़ी देश की इंजीनियरिंग की शानदार मिसाल—अटल टनल का नजारा राष्ट्रपति को भी खासा प्रभावित करता नजर आया।
मनाली की पहाड़ियों में मौसम लगातार ठंडा बना हुआ है। मंगलवार को रोहतांग सहित ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात हुआ था और बुधवार को भी पहाड़ों पर बर्फबारी जारी रही। हालांकि बुधवार सुबह मनाली में बारिश नहीं हुई, लेकिन आसमान में बादल छाए रहे। मौसम विभाग ने प्रदेश में बारिश और आंधी का अलर्ट भी जारी किया है। ठंड से बचने के लिए राष्ट्रपति ने वूलन कोट पहना था। अटल टनल के पास राष्ट्रपति ने बर्फ की सफेदी ओढ़े ब्यास कुंड और धुंधी की पहाड़ियों का भी दीदार किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी अटल टनल की जमकर तारीफ की। उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि अटल टनल भारत की तकनीकी क्षमता, दृढ़ संकल्प और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। राष्ट्रपति ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद देश की इस महत्वपूर्ण परियोजना को पूरा करने के लिए सीमा सड़क संगठन की सराहना की और अटल टनल को विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग का उदाहरण बताया।
जिस इलाके में पहाड़ रास्ता रोकते हैं, बर्फ आवाजाही पर ब्रेक लगाती है और मौसम हर कदम पर चुनौती बन जाता है, वहीं अटल टनल ने सालभर कनेक्टिविटी की नई राह खोल दी है।
राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए अटल टनल रोहतांग में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई। सुरक्षा कारणों से मंगलवार शाम से बुधवार दोपहर बाद तक टनल में भारी वाहनों की आवाजाही बंद रही। वहीं छोटे वाहनों को भी बुधवार सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक टनल की ओर जाने की अनुमति नहीं दी गई। राष्ट्रपति के अटल टनल से वापस लौटने के बाद वाहनों की आवाजाही सामान्य कर दी जाएगी।
बुधवार सुबह करीब साढ़े 9 बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का काफिला मनाली से अटल टनल के लिए रवाना हुआ। काफिले के रवाना होने के बाद पलचान से आगे अटल टनल की ओर केवल आपातकालीन वाहनों को ही जाने की अनुमति दी गई। राष्ट्रपति के काफिले के गुजरने के दौरान सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग खड़े दिखाई दिए। लोगों ने राष्ट्रपति के काफिले को उत्सुकता से देखा। इस दौरान कुछ जगहों पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन भी किया। राष्ट्रपति के साथ उनकी बेटी इतिश्री मुर्मु भी मौजूद हैं।
राष्ट्रपति के काफिले के गुजरते ही मनाली की सड़कों पर सुरक्षा के साथ-साथ लोगों की उत्सुकता भी साफ दिखाई दी।
अटल टनल पहुंचने पर डीजी बीआरओ लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने राष्ट्रपति को अटल टनल म्यूजियम के बारे में जानकारी दी। राष्ट्रपति ने म्यूजियम से जुड़ी जानकारी ली और इसके बाद विजिटर रजिस्टर में अपने हस्ताक्षर भी किए। द्रौपदी मुर्मु अटल टनल का दौरा करने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपति हैं। इससे पहले तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वर्ष 2022 में अटल टनल का दौरा किया था।
राष्ट्रपति के मनाली दौरे के दौरान प्रदेश के मंत्री राजेश धर्माणी, विधायक भुवनेश्वर गौड़ और विधायक अनुराधा राणा भी उनके साथ मौजूद रहे।
दोपहर बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करीब 3 बजे मनाली के प्रसिद्ध माता हिडिंबा मंदिर जाएंगी। यहां वह माता हिडिंबा के दर्शन कर पूजा-अर्चना करेंगी और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लेंगी। इसके बाद शाम करीब 5 बजे राष्ट्रपति के मनाली माल रोड घूमने का कार्यक्रम भी निर्धारित है। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए मनाली और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी गई है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस जवानों की तैनाती की गई है और राष्ट्रपति के पूरे रूट पर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।
अटल टनल देश की महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं में शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 अक्टूबर 2020 को इसका उद्घाटन किया था। करीब 9 किलोमीटर लंबी यह टनल एशिया की सबसे ऊंची और लंबी सुरंगों में शामिल है। इसके निर्माण के बाद लाहुल-स्पीति सालभर देश और दुनिया से जुड़ा रह सकता है। पहले भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों में यह क्षेत्र लंबे समय तक देश के बाकी हिस्सों से कट जाता था, लेकिन अटल टनल ने इस चुनौती को काफी हद तक खत्म कर दिया है। इसके साथ ही सीमावर्ती इलाकों तक सेना और जरूरी रसद पहुंचाना भी पहले के मुकाबले काफी आसान हुआ है।
अटल टनल ने न सिर्फ हिमालय की दूरी कम की है, बल्कि रणनीतिक लिहाज से भी भारत की ताकत को नई मजबूती दी है।
राष्ट्रपति का अटल टनल दौरा ऐसे समय हुआ है जब मनाली और रोहतांग क्षेत्र में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच राष्ट्रपति का यह दौरा जहां प्राकृतिक सुंदरता का गवाह बना, वहीं देश की तकनीकी और रणनीतिक क्षमता की एक बड़ी तस्वीर भी सामने आई। राष्ट्रपति द्वारा BRO की विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग की तारीफ ने इस परियोजना की अहमियत को और खास बना दिया है।


















