सुनवाई के दौरान अभिनेता के वकील ने बताया कि राजपाल यादव सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के तहत अदालत की रजिस्ट्री में दो करोड़ रुपये जमा करा चुके हैं। इसके बाद अदालत ने दोनों पक्षों को मध्यस्थ से संपर्क कर सुनवाई की तारीख तय करने को कहा।
पांच करोड़ के कर्ज से शुरू हुआ विवाद
यह मामला वर्ष 2010 में हुए एक वित्तीय समझौते से जुड़ा है। राजपाल यादव ने अपनी निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से पांच करोड़ रुपये लिए थे।
शिकायतकर्ता कंपनी का आरोप है कि भुगतान के लिए वर्ष 2013 में दिए गए 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक बाउंस हो गए। कंपनी के अनुसार, वर्ष 2012 में हुए समझौते के तहत राजपाल यादव, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी ब्याज सहित करीब 11 करोड़ रुपये चुकाने पर सहमत हुए थे।
पूर्व जज करेंगे विवाद का निपटारा
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि मामले से जुड़े मुद्दों को देखते हुए मध्यस्थता के जरिए समाधान तलाशना उचित होगा। न्यायमूर्ति नजमी वजीरी दोनों पक्षों से बातचीत कर विवाद सुलझाने की कोशिश करेंगे। जरूरत पड़ने पर वे पक्षों को व्यक्तिगत या ऑनलाइन पेश होने के लिए कह सकते हैं।
विदेश यात्रा पर रहेंगी शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को पासपोर्ट लौटाने का निर्देश दिया है, लेकिन विदेश यात्रा के लिए कुछ शर्तें लागू रहेंगी। राजपाल यादव को निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा और विदेश से लौटने के बाद निचली अदालत को इसकी जानकारी देनी होगी।
राजपाल यादव के वकील ने सात चेक बाउंस मामलों में दोषसिद्धि और तीन महीने की सजा को चुनौती देने वाली याचिका पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई का अनुरोध भी किया।
अब मामले में अगला कदम मध्यस्थता की प्रक्रिया होगी। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मध्यस्थता की रिपोर्ट मिलने के तुरंत बाद मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

















