Home Chandigarh चंडीमंदिर में सेना का बड़ा टेक्नोलॉजी मंथन, युद्धक क्षमता बढ़ाने पर फोकस

चंडीमंदिर में सेना का बड़ा टेक्नोलॉजी मंथन, युद्धक क्षमता बढ़ाने पर फोकस

चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित 

 

(Major military technology brainstorming session at Chandimandir; focus on enhancing combat capabilities) भारतीय सेना की पश्चिमी कमान आधुनिक युद्ध की चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी युद्धक क्षमताओं को और मजबूत करने की तैयारी में है। इसी दिशा में चंडीमंदिर मिलिट्री स्टेशन में 14 और 15 दिसंबर को मैकेनाइजेशन टेक्नोलॉजी सेमिनार (MTS 2.0) आयोजित किया जाएगा। इसमें सेना, रक्षा उद्योग और शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञ सैन्य प्लेटफॉर्म को आधुनिक तकनीक से लैस करने पर मंथन करेंगे।

रक्षा प्रवक्ता के अनुसार, सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) के सहयोग से आयोजित इस सेमिनार की थीम ‘CHAKRA – Transforming Existing Platforms for Future Combat’ रखी गई है। इसका उद्देश्य मौजूदा सैन्य प्रणालियों को भविष्य के युद्ध के लिए अधिक सक्षम और आधुनिक बनाना है।

तकनीक से बढ़ेगी सेना की ताकत

सेमिनार में युद्धक क्षमता बढ़ाने, नई तकनीक अपनाने, सैन्य उपकरणों के नवीनीकरण, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। सेना की परिचालन जरूरतों और तकनीकी कमियों की पहचान कर उनके व्यावहारिक समाधान तैयार करने पर विशेष जोर रहेगा।

सोमवार को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित कार्यक्रम के कर्टन रेजर की अध्यक्षता पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने की। इसमें सैन्य अधिकारियों, रक्षा उद्योग और शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों के बीच तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

पिछले साल 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने लिया था हिस्सा

सेमिनार के पहले संस्करण में पिछले वर्ष रक्षा उद्योग के 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इस दौरान 51 अत्याधुनिक रक्षा उत्पादों का प्रदर्शन किया गया था। इनमें लड़ाकू वाहन, सेंसर आधारित युद्ध प्रणाली, डिजिटल कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त प्रणालियां, उन्नत कवच सुरक्षा और आधुनिक संचार नेटवर्क से जुड़ी तकनीकें शामिल थीं।

पश्चिमी कमान के अनुसार, MTS 2.0 का लक्ष्य सेना, रक्षा उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के बीच सहयोग मजबूत करना तथा स्वदेशी तकनीकी समाधानों को बढ़ावा देना है। इससे मैकेनाइज्ड फोर्सेज की परिचालन क्षमता, मजबूती और युद्ध के लिए तैयारी को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

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