Home Delhi दिल्ली प्रदूषण में पराली का असर मामूली! रिपोर्ट ने खोली नई परत

दिल्ली प्रदूषण में पराली का असर मामूली! रिपोर्ट ने खोली नई परत

नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित 

 

(Impact of stubble burning on Delhi’s pollution is marginal! Report reveals a new dimension) दिल्ली के वायु प्रदूषण को लेकर जारी एक नई रिपोर्ट ने पराली जलाने की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। जलवायु अनुसंधान संस्था क्लाइमेट ट्रेंड्स के विश्लेषण के मुताबिक, 2024 से 2026 के सितंबर-अक्तूबर के आंकड़ों में पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं का दिल्ली के AQI पर असर सीमित दिखाई दिया। रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी की हवा की गुणवत्ता तय करने में स्थानीय गैर-कृषि प्रदूषण स्रोतों की भूमिका अधिक रही।

आग की घटनाएं लगभग स्थिर, AQI में 15.8% गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पंजाब और हरियाणा में आग की 201 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि 2026 में यह संख्या घटकर 193 रही—करीब 4 प्रतिशत की कमी। इसके बावजूद दिल्ली का औसत AQI 15.8 प्रतिशत गिरकर 169.3 से 142.6 पर आ गया।

इसके उलट, 2024 से 2025 के बीच आग की घटनाओं में 88 प्रतिशत की गिरावट आई, लेकिन दिल्ली के औसत AQI में केवल 3.9 प्रतिशत सुधार दर्ज हुआ। रिपोर्ट इन आंकड़ों के आधार पर पराली और दिल्ली के प्रदूषण के बीच सीधे संबंध को लेकर सावधानी बरतने की बात कहती है।

औसत AQI सुधरा, लेकिन आम दिन की हवा बिगड़ी

रिपोर्ट का एक अहम निष्कर्ष यह भी है कि औसत AQI में सुधार का मतलब यह नहीं कि दिल्ली की हवा लगातार साफ हुई। 2025 में 135 रहा AQI का मध्य मान 2026 में बढ़कर 154 हो गया, यानी करीब 14.1 प्रतिशत की वृद्धि।

मध्य मान यानी मेडियन AQI रोजाना की हवा की सामान्य स्थिति को समझने में मदद करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, सुधार मुख्य रूप से बेहद खराब प्रदूषण वाले दिनों की संख्या घटने से आया। AQI 200 से ऊपर रहने वाले दिन 10 से घटकर तीन रह गए, जबकि 2026 में AQI 300 के पार नहीं गया। पिछले साल अधिकतम स्तर 353 तक पहुंचा था।

मौसम नहीं, स्थानीय उत्सर्जन पर उठे सवाल

विश्लेषण के अनुसार, सितंबर-अक्तूबर 2026 में बारिश पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 78.2 प्रतिशत कम रही। इसके बावजूद प्रदूषण में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई। रिपोर्ट ने इसे दिल्ली के स्थानीय उत्सर्जन स्रोतों में बदलाव की संभावित भूमिका से जोड़कर देखा है।

हालांकि, ये निष्कर्ष सीमित अवधि के AQI आंकड़ों पर आधारित हैं। पराली जलाने, मौसम और स्थानीय प्रदूषण स्रोतों के वास्तविक योगदान को स्पष्ट करने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक आकलन जरूरी है।

रिपोर्ट का संकेत: दिल्ली के प्रदूषण का समाधान केवल पराली पर निर्भर नहीं हो सकता। स्थानीय स्तर पर वाहनों, निर्माण गतिविधियों, धूल और अन्य उत्सर्जन स्रोतों की भूमिका की भी गंभीर जांच जरूरी है।

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