करनाल। राजवीर दीक्षित
(Aniruddhacharya’s words, Rampal’s followers are enemies of Sanatan!) श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की एक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल के सेवादारों पर सनातन धर्म के विरोध का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें ईसाई समुदाय से कथित तौर पर समर्थन और फंडिंग मिलती है। उन्होंने लोगों से ऐसे कथित एजेंडे से बचने की अपील की।
करनाल के तरावड़ी में 5 सितंबर से चल रही श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर एक युवक ने रामपाल के अनुयायियों पर भगवान शिव और कृष्ण को लेकर आपत्तिजनक बातें कहने का आरोप लगाया। युवक ने कथावाचक से इस संबंध में सवाल किया।
‘सनातन के शत्रु’ बताया
युवक के सवाल के जवाब में अनिरुद्धाचार्य ने आरोप लगाया कि ऐसे लोग सनातन धर्म के विरोध में काम करते हैं। उन्होंने कहा कि ईसाई समुदाय सीधे तौर पर विरोध नहीं कर सकता, इसलिए कथित तौर पर ऐसे लोगों को साथ लेकर सनातन के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे एक एजेंडा बताते हुए इससे सावधान रहने की बात कही।
हालांकि, ईसाई समुदाय से फंडिंग मिलने संबंधी इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अंतरजातीय विवाह पर भी दिया था बयान
इसी कथा के दौरान 7 सितंबर को एक युवती ने अंतरजातीय विवाह को लेकर सवाल किया था। युवती ने बताया था कि वह दूसरी जाति के युवक से प्रेम करती थी और परिवार के विरोध के बावजूद उससे शादी की।
इस पर अनिरुद्धाचार्य ने कहा था कि संविधान व्यक्ति को अपनी पसंद से विवाह करने की स्वतंत्रता देता है, जबकि धार्मिक और पारिवारिक परंपराओं में विवाह को लेकर अलग मान्यताएं हैं। उन्होंने युवती से विवाह से पहले परिवार, संस्कार और भविष्य को समझने की बात कही थी।
उन्होंने प्रेम के संदर्भ में यह भी कहा था कि शादी से पहले व्यक्ति की पहचान और पृष्ठभूमि की जानकारी लेना जरूरी है।
कथा के दौरान लगातार चर्चा में रहे बयान
करनाल में आयोजित इस कथा के दौरान अनिरुद्धाचार्य के बयानों को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में भी हलचल देखने को मिली। ताजा टिप्पणी में उन्होंने रामपाल के अनुयायियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिस पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।



















