चंडीगढ़/हरियाणा । राजवीर दीक्षित
जांच के अनुसार हरियाणा सरकार के आठ विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों के बैंक खातों से सरकारी धन की हेराफेरी की गई। इसके अलावा दो निजी स्कूलों के खातों से भी रकम का गबन किया गया।
जांच एजेंसियों के मुताबिक इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड रिभव ऋषि, जो पहले चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित IDFC First Bank का शाखा प्रबंधक था, जिरकपुर के जेड मैनर (Jade Manor) में सरकारी अधिकारियों और घोटाले से जुड़े लोगों के लिए भव्य पार्टियों का आयोजन करता था।

ईडी के अनुसार, इस स्थान को लगभग 1 लाख रुपये प्रतिदिन के किराये पर बुक किया जाता था। पूछताछ में रिभव ऋषि ने स्वीकार किया कि इन पार्टियों में डीजे, डांसर, मनोरंजन कार्यक्रम और कॉल गर्ल्स की व्यवस्था की जाती थी तथा एक पार्टी पर 20 से 25 लाख रुपये तक खर्च किए जाते थे।
जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2025 के दौरान घोटाले से जुड़े लोगों, बैंक अधिकारियों, बिचौलियों और परिवार के सदस्यों के लिए दुबई, थाईलैंड और गोवा की कई यात्राएं कराई गईं।
इन यात्राओं में फ्लाइट टिकट, लग्जरी होटल, पार्टियां और अन्य खर्च शामिल थे। ईडी के अनुसार, ऐसे पांच अवसरों पर गबन की गई रकम से 2.01 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिनमें कथित एस्कॉर्ट सेवाओं के लिए भी भुगतान शामिल था।
जांच एजेंसियों ने खुलासा किया कि गबन की गई राशि से 4.92 करोड़ रुपये की छह लग्जरी गाड़ियां खरीदी गईं। इनमें रिभव ऋषि के लिए 78 लाख रुपये की Mercedes E-Class और 40 लाख रुपये की Toyota Fortuner खरीदी गई।
मुख्य आरोपी और रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा के लिए 2.64 करोड़ रुपये की Range Rover खरीदी गई। वहीं पंचायत विभाग के अधीक्षक नरेश कुमार और उनके परिवार के नाम पर भी करोड़ों रुपये की गाड़ियां खरीदी गईं।
ईडी ने 7 जुलाई को इस घोटाले से जुड़ी 200.84 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अटैच कीं। इनमें 179.84 करोड़ रुपये की 21 अचल संपत्तियां और 21 करोड़ रुपये की 23 चल संपत्तियां शामिल हैं।
62 बैंक खातों की जांच में ईडी को फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें, फर्जी RTGS अनुरोध पत्र और नकली बैंक दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकारी विभागों से धोखाधड़ी करने के सबूत मिले।
जांच के अनुसार, रिभव ऋषि और उसकी पत्नी ने चंडीगढ़ और पंचकूला में करोड़ों रुपये की संपत्तियां खरीदीं, जबकि मुख्य लाभार्थी विक्रम वाधवा और नरेश कुमार पर भी सरकारी धन से करोड़ों रुपये की संपत्तियां और निवेश करने के आरोप हैं।
जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी गहन जांच कर रही हैं।



















