चंबा । राजवीर दीक्षित
(Brought glory by winning bronze; now it’s time for gold! Chamba’s Seema will once again give it her all on the track) चंबा की धाविका सीमा एक बार फिर एशियाई खेलों के ट्रैक पर अपनी रफ्तार का जलवा दिखाने के लिए तैयार हैं। सोमवार को जापान के नागोया शहर में होने वाली 5000 मीटर दौड़ में सीमा हिस्सा लेंगी। इससे पहले 10 हजार मीटर रेस में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया था। इस उपलब्धि के बाद अब सीमा की नजरें 5000 मीटर में स्वर्ण पदक पर हैं। यानी मुकाबला सिर्फ रेस का नहीं, बल्कि कांस्य से गोल्ड तक पहुंचने के सपने का भी है। सीमा के इस मुकाबले को लेकर चंबा और पूरे हिमाचल में उत्साह है। प्रदेशवासियों की नजरें टीवी और अपडेट्स पर टिकी रहेंगी। हर कोई अपनी इस बेटी को जीतते हुए देखना चाहता है। सीमा के लिए शुभकामनाओं का सिलसिला जारी है और अब सभी को इंतजार है उनकी उस रफ्तार का, जो उन्हें गोल्ड मेडल तक पहुंचा सके।
मां की दुआ और बेटी की रफ्तार, सीमा के लिए मांगी जीत की मन्नत
जापान के नागोया में सीमा जब पांच हजार मीटर दौड़ के लिए ट्रैक पर उतरेंगी, उस समय उनके घर में उनकी मां केसरी देवी बेटी की जीत के लिए भगवान से प्रार्थना कर रही होंगी। सीमा की उपलब्धियों से उनकी माता बेहद खुश हैं। उन्होंने बेटी के लिए भगवान से जीत की अरदास करने के साथ कुलदेवी से मन्नत भी मांगी है। इससे पहले सीमा ने एशियाई खेलों में 10 हजार मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। अब पांच हजार मीटर मुकाबले में भी उनकी नजर एक और बड़ी उपलब्धि पर है। बेटी के संघर्ष और कामयाबी को याद कर मां केसरी देवी भावुक हो उठी हैं। उनकी आंखों से छलक रहे आंसू उनके दुख की नहीं, बल्कि उस खुशी और गर्व की निशानी हैं, जो एक मां को अपनी बेटी को देश के लिए चमकता देखकर महसूस होता है।
पति की मौत के बाद छह बच्चों की जिम्मेदारी, मां ने हिम्मत से बदले हालात
सीमा की मां केसरी देवी आज भी वह मुश्किल दौर याद करती हैं, जब पति की मौत के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ गई थी। छह बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी अकेले निभाना आसान नहीं था। हालात बेहद विकट थे, लेकिन केसरी देवी ने मुश्किलों के सामने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद को संभाला और अपने छह बच्चों को भी संभालते हुए उनकी परवरिश की। पति के जाने के बाद मां ने न सिर्फ परिवार को टूटने से बचाया, बल्कि अपने बच्चों के लिए खुद एक मजबूत सहारा बनकर खड़ी रहीं।



















