द टारगेट न्यूज़:
चंडीगढ़ के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने प्राधिकारियों के निर्देशों के बावजूद एक विधवा के पारिवारिक पेंशन को संशोधित न करने पर यूको बैंक के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने पंजाब के रूपनगर स्थित यूको बैंक शाखा के शाखा प्रबंधक को सेवा में कमी, मानसिक पीड़ा और मुकदमे के खर्च के रूप में शिकायतकर्ता को 15,000 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान बैंक द्वारा लंबित एरियर का भुगतान किए जाने के बावजूद उपभोक्ता अदालत ने स्पष्ट किया कि परिवार को उठानी पड़ी कठिनाई और उत्पीड़न को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह शिकायत रूपनगर निवासी सुखविंदर सिंह ने अपनी मां प्रकाश कौर की ओर से दर्ज कराई थी। सुखविंदर के पिता नबीब सिंह 31 मार्च 1995 को चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (CTU) से सेवानिवृत्त हुए थे और 28 नवंबर 2001 को उनके निधन के बाद पारिवारिक पेंशन उनकी पत्नी को ट्रांसफर कर दी गई थी। हालांकि, इसके बाद पेंशन में हुए संशोधनों को सही ढंग से लागू नहीं किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप था कि पेंशन-स्वीकृति प्राधिकारियों के कई आधिकारिक संचार, बार-बार बैंक शाखा के दौरे और औपचारिक अभ्यावेदन के बावजूद बैंक ने संशोधित पारिवारिक पेंशन, स्वीकार्य वृद्धावस्था भत्ते, लीव ट्रैवल कंसेशन (LTC) लाभ और संशोधित चिकित्सा भत्तों को जारी नहीं किया। सुनवाई के दौरान यूको बैंक के वकील ने दलील दी कि बैंक की भूमिका केवल पेंशन खाते के रखरखाव और निकासी तक सीमित है और देरी जानबूझकर नहीं बल्कि पुनर्गणना के दौरान हुई थी। आयोग ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि उपभोक्ता द्वारा शिकायत दर्ज कराने और कानूनी नोटिस भेजने के बाद ही बैंक ने पेंशन संरचना को ठीक किया और बकाया राशि जारी की, जिससे साबित होता है कि सेवा में कमी थी।