चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“CBI Exposes ChatGPT Bribery Conspiracy in Punjab Vigilance Case “) पंजाब से जुड़े कथित 20 लाख रुपये के रिश्वत मामले में सीबीआई की चार्जशीट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने ChatGPT जैसे एआई टूल का इस्तेमाल कर विजिलेंस विभाग की शैली में फर्जी शिकायतें तैयार कीं और इन्हीं शिकायतों के जरिए सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाकर उनसे पैसे वसूलने की साजिश रची।
सीबीआई के मुताबिक इस मामले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के तत्कालीन डीजीपी के रीडर ओम प्रकाश सिंह राणा, विकास गोयल, राघव गोयल और अंकित वाधवा को गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई मलोट में तैनात जीएसटी विभाग के ईटीओ अमित कुमार की शिकायत के आधार पर की गई। आरोप है कि अमित कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (DA) की शिकायत का डर दिखाकर उनसे 20 लाख रुपये की मांग की गई थी।
जांच के दौरान राघव गोयल के ChatGPT अकाउंट की पड़ताल में पता चला कि 28 अप्रैल 2026 को उसने अमित कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार, अवैध रिश्वतखोरी और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों वाली विजिलेंस शैली की शिकायत तैयार कराने के लिए एआई का इस्तेमाल किया। इसके अलावा पंजाब मंडी बोर्ड के फरीदकोट और फाजिल्का डिवीजन से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ भी इसी तरह की शिकायतें तैयार की गईं। इसी दिन इंस्पेक्टर वरुण यादव के खिलाफ भी एक फर्जी शिकायत बनाई गई, जिसमें शिकायतकर्ता के रूप में सुरिंदर सिंह नाम का इस्तेमाल किया गया।
सीबीआई का कहना है कि जांच के दौरान ऐसी शिकायतों की कॉपी सह-आरोपी ओम प्रकाश सिंह राणा के कार्यालय से भी बरामद हुई। एजेंसी का आरोप है कि राघव गोयल ने अलग-अलग सरकारी अधिकारियों के खिलाफ काल्पनिक पहचान का इस्तेमाल कर कई फर्जी शिकायतें तैयार कीं, जिनका उद्देश्य अधिकारियों को डराना, मानसिक दबाव बनाना और अवैध लाभ हासिल करना था।
चार्जशीट में सीबीआई ने इसे एक सुनियोजित आपराधिक साजिश बताया है। एजेंसी का कहना है कि संवेदनशील पद पर तैनात ओम प्रकाश सिंह राणा की भूमिका के कारण इस कथित नेटवर्क को सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करने में मदद मिली। फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत में चलेगी।



















