चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“No ITR Needed! People of This Indian State Get a Unique Income Tax Exemption “) भारत में हर साल लाखों लोग समय पर इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करते हैं। इस वर्ष भी ITR भरने की अंतिम तिथि 31 जुलाई तय की गई है और इसके बाद रिटर्न दाखिल करने पर जुर्माना देना पड़ सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा राज्य भी है, जहां के अधिकांश निवासियों को आयकर रिटर्न (ITR) भरने की जरूरत ही नहीं पड़ती? यह राज्य है सिक्किम, जिसे भारतीय कर व्यवस्था में विशेष दर्जा प्राप्त है।
दरअसल, सिक्किम के भारत में विलय का इतिहास इस विशेष छूट की सबसे बड़ी वजह है। वर्ष 1975 में भारत का हिस्सा बनने से पहले सिक्किम का अपना अलग आयकर कानून लागू था। भारत में शामिल होने के बाद भी वहां की कुछ विशेष व्यवस्थाओं को बरकरार रखा गया। बाद में आयकर अधिनियम की धारा 10(26AAA) के तहत सिक्किम के मूल निवासियों को आयकर से छूट देने का प्रावधान किया गया।
साल 2008 में केंद्र सरकार ने अधिकांश सिक्किमी निवासियों को आयकर से छूट दी थी। हालांकि शुरुआत में कुछ परिवार इस लाभ से बाहर रह गए थे, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद कानून में संशोधन किया गया। इसके बाद 26 अप्रैल 1975 या उससे पहले सिक्किम में बसे भारतीय नागरिकों को भी इस छूट का लाभ मिलना शुरू हो गया।
इतना ही नहीं, सिक्किम के निवासियों को निवेश के मामले में भी विशेष राहत मिली हुई है। वे भारत के शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए कई मामलों में पैन कार्ड की अनिवार्यता से भी छूट प्राप्त कर चुके हैं। यही कारण है कि सिक्किम भारत का एक ऐसा अनोखा राज्य माना जाता है, जहां के पात्र निवासियों को न केवल आयकर से राहत मिलती है, बल्कि उन्हें ITR दाखिल करने की बाध्यता भी सामान्य करदाताओं जैसी नहीं होती। हालांकि यह छूट केवल पात्र सिक्किमी निवासियों पर लागू होती है और सभी भारतीय नागरिकों पर नहीं।



















