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Starlink पर बैन की मांग, RSS से जुड़े संगठन ने उठाए राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल

नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित 
(Demand to ban Starlink; RSS-linked organization raises national security concerns) एलन मस्क की कंपनी Starlink की भारत में एंट्री को लेकर विवाद तेज हो गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच (SJM) ने कंपनी की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा पर राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते हुए भारत में इसके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

SJM के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने आरोप लगाया कि Starlink की तकनीक भारत की सुरक्षा और नियामकीय जरूरतों के लिए चुनौती बन सकती है। कंपनी ने भारत में व्यावसायिक सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं शुरू करने के लिए लाइसेंस आवेदन किया है, लेकिन उसे अभी मंजूरी नहीं मिली है। आवेदन खारिज भी नहीं किया गया है।

इंटरनेट ट्रैफिक की निगरानी पर चिंता

स्वदेशी जागरण मंच का कहना है कि Starlink के सैटेलाइट आपस में लेजर लिंक के जरिये डेटा भेज सकते हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भारतीय इंटरनेट ट्रैफिक देश के बाहर के नेटवर्क से होकर घरेलू सुरक्षा व्यवस्था को दरकिनार न करे। संगठन ने मांग की कि भारतीय डेटा का रूटिंग देश के भीतर स्थापित गेटवे के माध्यम से हो और जरूरत पड़ने पर सरकार संबंधित क्षेत्रों में सेवा को तुरंत सीमित या बंद कर सके।

महाजन के अनुसार, कंपनी ने इन शर्तों को पूरा करने को लेकर स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं दी है। उन्होंने आशंका जताई कि तकनीकी सीमाओं के कारण भी इन शर्तों का पालन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि, इन दावों पर Starlink की ओर से प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

संवेदनशील इलाकों में इस्तेमाल पर सवाल

SJM ने कहा कि सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकता है। संगठन ने यूक्रेन, ईरान, रूस और ताइवान सहित विभिन्न देशों के अनुभवों का हवाला देते हुए तकनीक के सुरक्षा प्रभावों की समीक्षा की मांग की।

संगठन का तर्क है कि दंगों, आतंकवाद या कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति में इंटरनेट सेवाओं को नियंत्रित करना जरूरी हो सकता है। इसलिए किसी भी नई संचार तकनीक को अनुमति देने से पहले निगरानी, डेटा रूटिंग और सेवा बंद करने की क्षमता सुनिश्चित होनी चाहिए।

Huawei का उदाहरण देकर स्वदेशी तकनीक पर जोर

स्वदेशी जागरण मंच ने चीन की कंपनी Huawei का उदाहरण देते हुए कहा कि उसने पहले 5G तकनीक के क्षेत्र में Huawei और ZTE की भागीदारी का विरोध किया था। संगठन के मुताबिक, बाद में भारत में स्वदेशी तकनीक के विकास को बढ़ावा मिला।

SJM ने दावा किया कि भारत को अपनी दूरसंचार तकनीक और घरेलू कंपनियों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उसका कहना है कि मौजूदा भारतीय दूरसंचार नेटवर्क सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय और जरूरत के अनुसार सेवाओं पर नियंत्रण की सुविधा देता है।

लाइसेंस पर फैसला बाकी

Starlink की भारत में सेवा शुरू करने की योजना अब भी लाइसेंस और नियामकीय मंजूरी पर निर्भर है। स्वदेशी जागरण मंच ने सरकार से सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान होने तक कंपनी को अनुमति न देने की मांग की है। फिलहाल कंपनी के लाइसेंस आवेदन पर अंतिम निर्णय की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

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