नाहन । राजवीर दीक्षित
(Four daughters of Himachal have brought glory to the nation! The kabaddi team won gold under Pushpa’s captaincy) जापान में आयोजित हो रहे 20वें एशियन गेम्स में शनिवार का दिन भारतीय खेल प्रेमियों के लिए बेहद खास रहा। भारतीय महिला कबड्डी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एशियाई खेलों में लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतकर गोल्ड की हैट्रिक पूरी कर ली है।
भारत की इस ऐतिहासिक जीत में हिमाचल प्रदेश की चार बेटियों ने भी अपनी प्रतिभा और दमखम का शानदार प्रदर्शन किया। पुष्पा राणा, रितु नेगी, ज्योति ठाकुर और भावना ठाकुर भारतीय टीम का अहम हिस्सा रहीं और टीम को गोल्ड तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
खास बात यह रही कि भारतीय टीम की कमान हिमाचल की बेटी पुष्पा राणा के हाथों में थी। कप्तान के तौर पर उन्होंने न सिर्फ टीम का शानदार नेतृत्व किया, बल्कि एक बेहतरीन डिफेंडर के रूप में कोर्ट पर अपना दम दिखाया। उनके मजबूत डिफेंस और शानदार प्रदर्शन ने भारतीय टीम को महत्वपूर्ण मौकों पर बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई। तिरंगे की शान बढ़ाने वाली इस जीत ने हिमाचल की चार बेटियों को भी पूरे देश की नजरों में ला दिया है।
पिता ने सिखाई कबड्डी की चाल, बेटी ने मैदान में रचा अपना सफर
कहानी एक छोटे से गांव से शुरू होती है, जहां कबड्डी सिर्फ एक खेल नहीं बल्कि परिवार का हिस्सा थी। सिरमौर के शिलाई क्षेत्र के मिल्लाह गांव में जन्मीं पुष्पा राणा ने अपने पिता जयपाल और भाई संजीव के साथ कबड्डी खेलते-खेलते इस खेल को अपना जुनून बना लिया। पिता जयपाल शिक्षक होने के साथ खुद भी कबड्डी खिलाड़ी रह चुके हैं। ऐसे में पुष्पा को खेल की शुरुआती ट्रेनिंग घर से ही मिली। परिवार के सहयोग ने उनके हौसले को मजबूत किया और देखते ही देखते गांव की गलियों में शुरू हुआ यह सफर स्कूल, कॉलेज, जिला और राज्य स्तर से होता हुआ राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंच गया।
रेडिंग से डिफेंस तक छाईं पुष्पा राणा, कप्तानी में रचा गोल्डन इतिहास
पुष्पा राणा सिर्फ एक बेहतरीन रेडर ही नहीं, बल्कि रेडिंग और डिफेंस दोनों में शानदार संतुलन रखने वाली खिलाड़ी हैं। राइट रेडर के तौर पर खेलते हुए वह बोनस अंक हासिल करने और सटीक हैंडटच लगाने में माहिर मानी जाती हैं। उनकी यही तकनीकी कुशलता उन्हें विरोधी टीम के लिए बड़ी चुनौती बनाती है।
मैदान पर उनकी फुर्ती, सही समय पर लिया गया फैसला और दबाव में शानदार प्रदर्शन उन्हें एक अलग पहचान दिलाता है। यही वजह है कि भारतीय टीम में पुष्पा की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।उनकी कप्तानी में नेशनल गेम्स में टीम ने लगातार तीन बार गोल्ड मेडल जीतकर कबड्डी के इतिहास में अपनी खास जगह बना ली।
हिमाचली बेटियों की कामयाबी पर कबड्डी एसोसिएशन ने थपथपाई पीठ
एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम की शानदार उपलब्धि पर हिमाचल प्रदेश कबड्डी एसोसिएशन ने खुशी जताई है। एसोसिएशन के महासचिव कुलदीप राणा ने भारतीय टीम के साथ हिमाचल की चारों बेटियों को शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों ने प्रदेश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया है। हिमाचल की इन बेटियों की मेहनत और जज्बा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।



















