Home SGPC बेअदबी कानून पर बड़ा कदम! सरकार-SGPC में बातचीत का रास्ता साफ

बेअदबी कानून पर बड़ा कदम! सरकार-SGPC में बातचीत का रास्ता साफ

चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित 

(Major move on the sacrilege law! Path cleared for talks between the government and the SGPC)पंजाब के बेअदबी रोधी कानून में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर राज्य सरकार और SGPC के बीच औपचारिक बातचीत की जमीन तैयार हो गई है। पंजाब सरकार ने अकाल तख्त के जत्थेदार को सात सदस्यीय समिति के गठन और उसकी जिम्मेदारियों की औपचारिक जानकारी दे दी है।

सरकार की ओर से गठित सात सदस्यीय समिति ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के साथ करीब दो घंटे बैठक की। बैठक को मुख्य रूप से परिचयात्मक बताया गया। अब समिति पहले अपने स्तर पर कानून से जुड़े मुद्दों पर विचार करेगी और इसके बाद SGPC की ओर से गठित पांच सदस्यीय समिति के साथ चर्चा करेगी।

कौन-कौन समिति में शामिल?

सात सदस्यीय पैनल में पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, दमदमी टकसाल प्रमुख संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा, संत बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति जसपाल सिंह, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति गुरबीर सिंह, पूर्व IPS अधिकारी एवं पूर्व PPSC चेयरमैन जतिंदर सिंह औलख और कानून अधिकारी प्रीत इंदर पाल सिंह शामिल हैं।

कानून की धाराओं पर उठे हैं सवाल

‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट, 2026’ को लेकर अकाल तख्त की ओर से कानून की कुछ धाराओं पर आपत्तियां जताई गई हैं। इनमें ‘कस्टोडियन’ की भूमिका और पवित्र स्वरूपों से संबंधित प्रावधानों सहित अन्य मुद्दे शामिल हैं। अकाल तख्त की ओर से संशोधनों को लेकर सुझाव भी दिए गए हैं।

पंजाब सरकार ने 16 सितंबर को सात सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति को अकाल तख्त की ओर से गठित पैनल के साथ लगातार समन्वय रखने, विचार-विमर्श करने और कानून से जुड़े मुद्दों पर सरकार को सुझाव व रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी दी गई है।

अब SGPC पैनल से होगी चर्चा

मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद समिति ने तय किया है कि पहले वह अपने सदस्यों के बीच विस्तृत विचार-विमर्श करेगी। इसके बाद SGPC की पांच सदस्यीय समिति के साथ प्रस्तावित संशोधनों पर बातचीत होगी। इस प्रक्रिया से कानून की विवादित धाराओं पर सरकार और सिख धार्मिक संस्थाओं के बीच औपचारिक संवाद का रास्ता खुल गया है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी बैठक के दौरान कानून की मूल भावना को बनाए रखने की बात कही है। वहीं, प्रस्तावित संशोधनों पर अंतिम स्थिति संबंधित समितियों की चर्चा और आगे की सरकारी प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।

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