टारगेट न्यूज़ ब्यूरो: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पीजीआईएमएस रोहतक के मेडिकल सुपरिटेंडेंट (एमएस) डॉ. कुंदन मित्तल की पुनर्नियुक्ति के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस मामले ने हरियाणा के चिकित्सा जगत में हलचल मचा दी है, क्योंकि अदालत ने अब 58 वर्ष की आयु सीमा के नियमों की वैधता और नियुक्ति प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों की गहन जांच शुरू कर दी है।
नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
यह मामला एक याचिका के माध्यम से सामने आया, जिसमें डॉ. मित्तल की सेवा विस्तार को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार, इस पद के लिए 58 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित है, जिसका उल्लंघन किया गया है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि यह पुनर्नियुक्ति योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि बाहरी राजनीतिक दबाव और सिफारिशों के चलते की गई थी।
राजनीतिक सिफारिश का मामला
याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष एक पूर्व मंत्री द्वारा लिखी गई सिफारिशी चिट्ठी का हवाला दिया है। इस पत्र में डॉ. मित्तल की सेवा जारी रखने का पुरजोर समर्थन किया गया था। अदालत ने इस पहलू को गंभीरता से लेते हुए पूछा है कि क्या प्रशासनिक नियुक्तियों में इस तरह की सिफारिशों का कोई स्थान है।
अदालत की टिप्पणी और आगे की राह
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय के वैधानिक नियमों का पालन करना अनिवार्य है। 58 वर्ष की आयु सीमा का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है, और इस मामले में नियमों की व्याख्या की जाएगी।
- पीजीआईएमएस रोहतक के एमएस की पुनर्नियुक्ति पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक।
- 58 वर्ष की आयु सीमा के उल्लंघन को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से मांगा जवाब।
- पूर्व मंत्री की सिफारिशी चिट्ठी पर अदालत ने जताई चिंता।
- मामले की अगली सुनवाई में विश्वविद्यालय के वैधानिक नियमों की समीक्षा की जाएगी।
फिलहाल, हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। इस फैसले से पीजीआईएमएस प्रशासन पर प्रशासनिक सुधारों और नियमों के पालन को लेकर भारी दबाव बढ़ गया है।



















