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मछली उत्पादन में उछाल की उम्मीद! पौंग जलाशय में छोड़े जाएंगे 17 लाख बीज

कांगड़ा।राजवीर दीक्षित

हिमाचल प्रदेश के पौंग जलाशय यानी महाराणा प्रताप सागर में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए मत्स्य विभाग ने मछली बीज डालने का अभियान शुरू किया है। इस वर्ष 17 लाख मछली बीज छोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से सोमवार तक 12.95 लाख से अधिक बीज जलाशय में छोड़े जा चुके हैं। इस जलाशय पर निर्भर करीब 3,600 मछुआरा परिवारों की आजीविका के लिहाज से यह अभियान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विभाग के अनुसार, अभियान के तहत कतला के 5 लाख, मोरी के 1 लाख, रोहू के 7.25 लाख और ग्रास कार्प के 3.75 लाख बीज छोड़ने की योजना है। छोड़े जा रहे मछली बीजों का आकार 70 मिलीमीटर से अधिक है।

सहायक निदेशक मत्स्य संदीप कुमार ने बताया कि मछली बीजों की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। अभियान की निगरानी संयुक्त निदेशक मत्स्य पवन कुमार की अध्यक्षता वाली समिति कर रही है। विभागीय कर्मचारी और स्थानीय मत्स्य सहकारी समितियों के सदस्य भी इस कार्य में सहयोग दे रहे हैं।

जलाशय के किनारे स्थित सिहाल और जंबल बसी को मछली बीज छोड़ने के लिए चिन्हित किया गया है। विभाग के मुताबिक, अभियान का उद्देश्य जलाशय में मछली संसाधन को मजबूत करना और मछुआरा परिवारों की आजीविका को सहारा देना है। हालांकि, इसका दीर्घकालिक लाभ मछलियों के जीवित रहने, उनकी वृद्धि, पर्यावरणीय परिस्थितियों और टिकाऊ मत्स्य पालन पर निर्भर करेगा।

पौंग जलाशय में मछली बीज डालने के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस वर्ष लक्ष्य में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है।

  • 2024: 65 लाख मछली बीज छोड़े गए।

  • 2025: 62.52 लाख मछली बीज छोड़े गए।

  • 2026: 17 लाख मछली बीज छोड़ने का लक्ष्य।

विभाग के बजट में कमी और दो महीने के प्रतिबंधित मौसम के दौरान मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन को इस कटौती के संभावित कारण बताया जा रहा है। हालांकि, लक्ष्य में इतनी बड़ी कमी का मछली उत्पादन और मछुआरों की कमाई पर क्या असर पड़ेगा, यह आगे स्पष्ट होगा।

करीब 24 हजार हेक्टेयर में फैला पौंग जलाशय लगभग 42 किलोमीटर लंबा और 19 किलोमीटर चौड़ा है। यह कांगड़ा जिले के निचले पहाड़ी क्षेत्र में अंतर्देशीय मत्स्य पालन का प्रमुख केंद्र है।

विभाग ने इस वर्ष 346.32 मीट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि छोड़े गए मछली बीज कितनी संख्या में विकसित होते हैं और जलाशय में मछली उत्पादन को कितना बढ़ावा मिलता है।

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