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स्मार्ट सिटी लुधियाना बना बदबू और जलभराव का शहर, कचरे के ढेर से लोग परेशान

चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित

(“Smart City Ludhiana Turns Into Garbage & Waterlogging Crisis “) पंजाब का सबसे समृद्ध औद्योगिक शहर लुधियाना इन दिनों गंभीर सफाई और जलभराव संकट से जूझ रहा है। शहर में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल छठे दिन भी जारी है, जिसके चलते हर गली-मोहल्ले में कचरे के ढेर लगे हैं। बारिश के बाद हालात और भी बदतर हो गए हैं। सड़कों पर जमा गंदा पानी, उफनते सीवर और सड़ता कचरा पूरे शहर में बदबू फैला रहा है। लोगों को अब डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का डर सताने लगा है।

नगर निगम आयुक्त ओजस्वी अलंकार ने कहा कि कचरा उठाने में बाधा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए टीमें बनाई गई हैं और जल्द ही कचरा कॉम्पैक्टर चालू किया जाएगा। वहीं, हड़ताली कर्मचारी मुख्यमंत्री भगवंत मान के प्रस्तावित लुधियाना दौरे के दौरान अपनी मांगें सीधे उनके सामने रखने की तैयारी में हैं।

गुरुवार को महज तीन घंटे की बारिश ने स्मार्ट सिटी की पोल खोल दी। शहर की प्रमुख सड़कें नदी में तब्दील हो गईं, घरों और दुकानों में पानी घुस गया और लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। तालाब बाजार, चौड़ा बाजार, प्रताप बाजार, गुर मंडी, केसरगंज और टाउन हॉल रोड समेत कई इलाके जलभराव से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे।

2016 में स्मार्ट सिटी घोषित होने के बावजूद लुधियाना आज भी प्रभावी स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम से वंचित है। केंद्र और पंजाब सरकार द्वारा स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत करीब 1000 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन शहर की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जाम सीवर, अधूरे ड्रेनेज प्रोजेक्ट, बार-बार सड़क खुदाई और खराब शहरी योजना ने हालात को और गंभीर बना दिया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर मानसून में यही स्थिति बन जाती है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया। करोड़ों की अर्थव्यवस्था वाला यह शहर आज कचरे, बदबू और जलभराव के बीच अपने “स्मार्ट सिटी” होने के दावे पर सवाल खड़े करता नजर आ रहा है।

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