मंडी/शिमला । राजवीर दीक्षित
(Uproar over SIR in Himachal! Congress stages massive protest against the Election Commission) हिमाचल प्रदेश में SIR को लेकर सियासी टकराव तेज होता नजर आ रहा है। कांग्रेस ने सोमवार को राज्यभर में प्रदर्शन कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर अपना विरोध जताया।
शिमला, हमीरपुर, ऊना, धर्मशाला और मंडी समेत कई जगहों पर कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। रैलियों के दौरान हाथों में झंडे और विरोध संदेश लिखी तख्तियां नजर आईं। कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें सामने रखीं।
मंडी में कांग्रेस भवन से निकली रैली सेरी मंच होते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंची। यहां कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। इसके बाद उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया।
कांग्रेस का आरोप है कि SIR से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए और मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए।
13 करोड़ नाम हटने के आरोप से गरमाई सियासत, SIR के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन
SIR को लेकर कांग्रेस का विरोध लगातार तेज होता नजर आ रहा है। पूर्व मुख्य संसदीय सचिव सोहन लाल के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस की ओर से देशभर में उनके खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे हैं। सोहन लाल ने आरोप लगाया कि SIR के माध्यम से करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने के आरोप बेहद गंभीर हैं और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने चुनाव आयोग से पूरी प्रक्रिया को लेकर जवाब देने की मांग की और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी उठाई।
3में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे।
प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के कार्यालयों की ओर मार्च किया और SIR प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही की मांग उठाई।
कांग्रेस का आरोप है कि अगर किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से बाहर होता है तो इसका सीधा असर उसके मतदान के अधिकार पर पड़ सकता है। दूसरी तरफ चुनाव आयोग लगातार यह स्पष्ट कर रहा है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है। यही वजह है कि SIR अब सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक और चुनावी मुद्दा बन गया है।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर क्यों मचा बवाल?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका मकसद मतदाता सूची को अपडेट करना और यह सुनिश्चित करना है कि पात्र नागरिकों के नाम सूची में मौजूद रहें, जबकि अपात्र या गलत प्रविष्टियों को हटाया जा सके।
लेकिन अब यही प्रक्रिया राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है। कांग्रेस का आरोप है कि SIR के दौरान बड़े स्तर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है। पार्टी ने इसको लेकर चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं।
25 सितंबर को कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन इसी मुद्दे पर हुआ। कई राज्यों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालयों की ओर मार्च किया और CEC के इस्तीफे की मांग की।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इस मुद्दे को लेकर चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल उठाते रहे हैं। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग SIR को नियमित चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए मतदाता सूची की शुद्धता पर जोर दे रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या SIR से वास्तव में मतदाता सूची और ज्यादा सटीक होगी, या फिर नाम हटाए जाने को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान होगा? इस मुद्दे पर सियासी टकराव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।



















