Home crime 13 साल पुराने यौन उत्पीड़न मामले में तरुण तेजपाल दोषी करार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने बरी करने का फैसला पलटा

13 साल पुराने यौन उत्पीड़न मामले में तरुण तेजपाल दोषी करार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने बरी करने का फैसला पलटा

मुंबई/गोवा। राजवीर दीक्षित

(Tarun Tejpal Convicted in 13-Year-Old Sexual Assault Case, Bombay High Court Reverses Acquittal)बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार को 2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न मामले में तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को दोषी करार देते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए बरी करने के फैसले को रद्द कर दिया।

फैसले का स्वागत करते हुए मामले की तत्कालीन जांच अधिकारी और गोवा पुलिस की वरिष्ठ अधिकारी सुनीता सावंत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट साक्ष्यों का सही तरीके से मूल्यांकन करने में विफल रहा था, जबकि हाईकोर्ट ने सभी सबूतों की सही समीक्षा करते हुए बरी करने का फैसला पलट दिया।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को “गलत और तथ्यों के विपरीत” मानते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

अदालत ने सजा की अवधि पर दोनों पक्षों की दलीलें सुन ली हैं और दोपहर 2:30 बजे सजा पर फैसला सुनाया जाएगा।  भारतीय कानून के तहत इस अपराध में कम से कम 10 साल की सजा, जबकि अधिकतम आजीवन कारावास का प्रावधान है।

गोवा के एडवोकेट जनरल देविदास पंगम ने भी फैसले का स्वागत करते हुए इसे “न्याय और ठोस साक्ष्यों पर आधारित फैसला” बताया। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध सबूतों के बावजूद तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था और फैसले में पीड़िता के चरित्र पर अनावश्यक टिप्पणियां की गई थीं। हाईकोर्ट के इस निर्णय से पीड़िता को आखिरकार न्याय मिला है।
उन्होंने बताया कि जांच के दौरान ऐसे कई अहम साक्ष्य सामने आए थे, जिनमें तरुण तेजपाल द्वारा भेजे गए माफी मांगने वाले ईमेल भी शामिल थे। इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था।

यह मामला नवंबर 2013 का है, जब एक महिला पत्रकार ने आरोप लगाया था कि गोवा के एक होटल की लिफ्ट में 7 और 8 नवंबर को तरुण तेजपाल ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। नवंबर 2013 में उनकी गिरफ्तारी हुई थी। वर्ष 2021 में गोवा की सत्र अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ गोवा सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अब हाईकोर्ट ने उस फैसले को पलटते हुए तरुण तेजपाल को दोषी करार दिया है। (ANI)

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