चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(“Punjab Assembly: Education, Jobs & Schools Under Scanner “) पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को शिक्षा व्यवस्था, सरकारी नौकरियों और सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। उच्च शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने सदन में स्वीकार किया कि राज्य के सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के 5,686 स्वीकृत पदों में से 2,424 पद खाली हैं। यानी करीब 42 प्रतिशत पद रिक्त हैं।
कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह ढिल्लों ने सरकार के शिक्षा क्रांति के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश के 64 सरकारी कॉलेज गेस्ट फैकल्टी और पार्ट-टाइम शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि कॉलेजों में केवल 143 नियमित शिक्षक, जबकि 760 गेस्ट फैकल्टी और 100 पार्ट-टाइम शिक्षक कार्यरत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई सरकारी कॉलेजों में प्रिंसिपलों की भी भारी कमी है।

ढिल्लों ने गेस्ट फैकल्टी को नियमित करने का मुद्दा भी उठाया। इस पर मंत्री हरजोत बैंस ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्तियां रद्द किए जाने के बावजूद 1,158 असिस्टेंट प्रोफेसरों और लाइब्रेरियन की नौकरियां बचाने के लिए सरकार प्रयास कर रही है।
सदन में एक और अहम खुलासा तब हुआ जब मंत्री ने बताया कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या वर्ष 2021-22 के 29.62 लाख से घटकर 2026-27 में 23.64 लाख रह गई है। सरकार ने इस गिरावट की वजह पहले हुए फर्जी दाखिलों को बताया।
वहीं सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने मांग की कि जिस तरह किसानों को मुफ्त बिजली दी जाती है, उसी तरह सरकारी स्कूलों को भी बिजली मुफ्त दी जाए। ऊर्जा मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध ने कहा कि सरकार इस सुझाव पर विचार करेगी। कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने बताया कि PEDA के माध्यम से स्कूलों और अस्पतालों में सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं, जिससे बिजली का खर्च कम होगा।
जीरा से आम आदमी पार्टी के विधायक नरेश कटारिया ने अपने क्षेत्र में खेल मैदानों के निर्माण में हो रही देरी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चार वर्षों में केवल एक मैदान तैयार हुआ है, जबकि 29 मैदानों का वादा किया गया था।
उधर अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के नेता मनप्रीत सिंह अयाली ने सरकार से मांग की कि पंजाब के सरकारी पदों पर सबसे पहला अधिकार राज्य के युवाओं का होना चाहिए। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि अब तक सरकारी नौकरियों में दूसरे राज्यों के कितने अभ्यर्थियों की भर्ती की गई है।



















