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हिमकेयर पर बड़ा बवाल! जयराम ठाकुर ने पूछा- नकली दवा रैकेट की जांच क्यों रुकी?

शिमला । राजवीर दीक्षित

(Major uproar over Himcare! Jairam Thakur asks—why has the investigation into the spurious medicine racket stalled) हिमकेयर योजना से जुड़े कथित नकली दवाओं के मामले में विपक्ष ने प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने 1 जुलाई को पत्र जारी कर मामले की जांच करने में असमर्थता जताई थी। ब्यूरो ने जांच को वित्तीय रूप से जटिल बताते हुए पर्याप्त मैनपावर और संसाधनों की कमी का उल्लेख किया। साथ ही राजस्व विभाग से संबंधित तकनीकी और डोमेन विशेषज्ञता की कमी को भी जांच में बाधा बताया गया।हिमकेयर जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना से जुड़े मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर विपक्ष लगातार आवाज उठा रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर हिमकेयर मामले की जांच इतनी प्राथमिकता के साथ की जा सकती है, तो फिर नकली दवाओं, कथित जीएसटी चोरी और रिकॉर्ड में हेराफेरी जैसे मामलों को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है। उनका कहना है कि सभी मामलों में समान रूप से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों की निष्पक्षता तभी साबित होगी, जब हर गंभीर आरोप पर समान गंभीरता से कार्रवाई हो।अब सवाल यह भी है कि इन आरोपों की जांच की जिम्मेदारी आखिर कौन उठाएगा और कार्रवाई की शुरुआत कब होगी?
उन्होंने अपने दावे में कहा कि संबंधित दवा निर्माता पर नकली दवाओं की बिक्री करने के साथ-साथ जीएसटी चोरी के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड में कथित रूप से बदलाव करने के आरोप हैं। इसके साथ ही, एक अन्य प्रतिनिधित्व का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि करीब 27 से 28 टन कच्चे माल की कथित तौर पर अवैध सप्लाई किए जाने और इसमें जीएसटी चोरी की आशंका भी जताई गई है।
नकली दवाओं के मामले की जांच में तकनीकी और वित्तीय विशेषज्ञता की कमी बताए जाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि जब हिमकेयर से जुड़े मामलों की जांच संभव है, तो इस मामले में विशेषज्ञता की कमी को आधार क्यों बनाया गया।

मामला सिर्फ जांच का नहीं, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता का भी है। यदि वित्तीय अनियमितताओं के आरोप गंभीर हैं, तो उनकी निष्पक्ष और विशेषज्ञों की मदद से जांच होनी चाहिए। जनता यह जानना चाहती है कि आखिर जांच की प्रक्रिया में ऐसी स्थिति क्यों बनी और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है।

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