चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(Former ED officer makes political entry into Amritpal’s party!) पंजाब की राजनीति में बुधवार को एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह ने सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) का दामन थाम लिया। चंडीगढ़ में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष तरसेम सिंह और विधायक मनप्रीत सिंह अयाली की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली। पूर्व DSP बलविंदर सिंह सेखों ने भी इसी मौके पर पार्टी जॉइन की।
ड्रग और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोले निरंजन
पार्टी में शामिल होने के बाद निरंजन सिंह ने कहा कि वह मूल रूप से राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं और राजनीति में आने की उनकी इच्छा भी नहीं थी। उन्होंने पंजाब में नशे और भ्रष्टाचार को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि व्यवस्था में बदलाव के लिए लोगों को सवाल पूछने होंगे।
निरंजन सिंह ने कहा कि समाज में सवाल पूछने की आदत कम हुई है और लोग अपने निजी नफा-नुकसान तक सीमित हो गए हैं। उन्होंने पंजाब के हित में लोगों से आवाज उठाने की बात कही। उनके मुताबिक, नशे की समस्या को लेकर कई सरकारों के दावों के बावजूद यह मुद्दा खत्म नहीं हुआ।
6 हजार करोड़ के चर्चित ड्रग केस से मिली पहचान
निरंजन सिंह ED में रहते हुए पंजाब के चर्चित जगदीश सिंह भोला ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच से जुड़े रहे। ED ने 2013 में PMLA के तहत इस मामले में जांच शुरू की थी। यह केस करीब 6,000 करोड़ रुपये के ड्रग रैकेट से जुड़ा बताया गया था। निरंजन सिंह इस जांच में इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर रहे।
2024 में मोहाली की विशेष PMLA अदालत ने इस मामले में 17 आरोपियों को दोषी ठहराया। कुल 23 आरोपी मामले में शामिल थे, जिनमें चार की ट्रायल के दौरान मौत हो गई और दो को घोषित अपराधी बताया गया। अदालत ने जगदीश सिंह भोला को 10 साल की सजा सुनाई थी।
तत्कालीन मंत्री बिक्रम मजीठिया से भी हुई थी पूछताछ
इस केस की जांच के दौरान निरंजन सिंह ने तत्कालीन पंजाब राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से 26 दिसंबर 2014 को पूछताछ की थी। मजीठिया से पूछताछ ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में हुई थी। उस समय मामले में सामने आए आरोपों को मजीठिया ने खारिज किया था।
पूछताछ के कुछ सप्ताह बाद, जनवरी 2015 में निरंजन सिंह का जालंधर से कोलकाता ट्रांसफर कर दिया गया। उन्होंने इस ट्रांसफर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी। अदालत में उनकी ओर से यह दावा किया गया था कि मजीठिया से पूछताछ के कारण उनका ट्रांसफर हुआ। दूसरी ओर, ED ने ट्रांसफर को प्रशासनिक फैसला बताया था।
हाईकोर्ट के दखल के बाद ट्रांसफर रद्द
निरंजन सिंह के ट्रांसफर का मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद अदालत ने उनके ट्रांसफर पर रोक लगाई। बाद में नवंबर 2015 में ED ने उनका ट्रांसफर रद्द कर दिया और उन्हें जालंधर में ड्रग केस की जांच जारी रखने की अनुमति मिली।
इसके बाद भी निरंजन सिंह जांच से जुड़े रहे। 2016 में उन्होंने मजीठिया को दोबारा समन किया था। इस बार मजीठिया व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए और लिखित जवाब दिया था। इसी दौरान निरंजन सिंह को असिस्टेंट डायरेक्टर से डिप्टी डायरेक्टर पद पर पदोन्नति मिली।
ED से इस्तीफा दिया, फिर वापस लिया
निरंजन सिंह ने अक्टूबर 2018 में ED से इस्तीफा देने का फैसला किया था। हालांकि, कुछ दिनों बाद उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया। बाद में उन्होंने 31 मई 2021 को ED के डिप्टी डायरेक्टर पद से सेवानिवृत्ति ली।
उनकी ED सेवा के दौरान जालंधर ऑफिस में तैनाती रही और उन्होंने पंजाब से जुड़े कई मामलों पर काम किया। 2024 में भोला केस में 17 आरोपियों की सजा के बाद भी वह इस मामले की जांच में अपनी भूमिका को लेकर सार्वजनिक रूप से बोलते रहे।
पूर्व DSP बलविंदर सेखों भी पार्टी में शामिल
निरंजन सिंह के साथ पंजाब पुलिस के पूर्व DSP बलविंदर सिंह सेखों ने भी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) जॉइन किया। सेखों पहले भी राजनीतिक और प्रशासनिक विवादों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उन्होंने 2022 में लुधियाना वेस्ट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव भी लड़ा था।
राजनीति में नई भूमिका पर अभी तस्वीर साफ नहीं
निरंजन सिंह की पार्टी में एंट्री ऐसे समय हुई है जब पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। हालांकि, उनके चुनाव लड़ने को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। निरंजन सिंह ने भी कहा है कि उन्होंने अभी चुनाव लड़ने के बारे में कोई फैसला नहीं किया है।
निरंजन सिंह का ED के चर्चित ड्रग केस से लेकर अब सक्रिय राजनीति में प्रवेश तक का सफर पंजाब की मौजूदा राजनीतिक गतिविधियों में एक नया घटनाक्रम जरूर जोड़ता है।



















