शिमला । राजवीर दीक्षित
(New rule for tourists in Himachal! Waste disposal fee may soon be mandatory) हिमाचल प्रदेश में लगातार बढ़ते पर्यटन के बीच कचरा प्रबंधन को लेकर नई व्यवस्था की तैयारी है। सरकार के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026 के तहत मशहूर और अधिक भीड़ वाले पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटकों से वेस्ट मैनेजमेंट फीस वसूलने का रास्ता साफ किया गया है। इन नियमों के मुताबिक स्थानीय अधिकारियों को ऐसे पर्यटन स्थलों पर शुल्क लगाने का अधिकार होगा, जहां पर्यटकों की भारी आवाजाही रहती है। हालांकि, फीस कितनी होगी, यह संबंधित पर्यटन स्थल के स्थानीय अधिकारी संबंधित विभागों से बातचीत के बाद तय करेंगे। अभी न तो शुल्क की राशि तय हुई है और न ही इसे लागू करने की तारीख सामने आई है। यानी हिमाचल में पर्यटकों को कचरा प्रबंधन के लिए फीस देनी होगी या नहीं, यह जल्द होने वाले सरकारी फैसले पर निर्भर करेगा।
शिमला-मनाली में बढ़ते कचरे ने बढ़ाई चिंता, ग्रीन टैक्स पर फिर चर्चा तेज
हिमाचल प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर बढ़ती पर्यटकों की संख्या के साथ कचरा प्रबंधन बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। खासकर पीक सीजन में शिमला और मनाली में भारी मात्रा में कचरा निकलता है।
मनाली में बाहरी राज्यों की गाड़ियों से पहले से ग्रीन टैक्स लिया जा रहा है। दूसरी ओर, शिमला नगर निगम पर्यटकों पर ग्रीन टैक्स लगाने के प्रस्ताव कई बार पारित कर चुका है, लेकिन राज्य सरकार की हरी झंडी अब तक नहीं मिली।
2016 के नियमों की विदाई, 2026 का नया कचरा कानून लागू! जानिए क्या बदला
2016 में बनाए गए नियमों को हटाकर 2026 के नए Solid Waste Management Rules लागू कर दिए गए हैं। 1 अप्रैल से प्रभावी इन नियमों का दायरा पहले के मुकाबले व्यापक है। अब शहरों के साथ गांव, कमर्शियल क्षेत्र, संस्थान और सरकारी कार्यालय भी इस व्यवस्था का हिस्सा होंगे। यानी कचरे के प्रबंधन को लेकर जिम्मेदारी का दायरा अब और बड़ा हो गया है।
गांवों में भी लगेगा कचरा उठाने का चार्ज! पंचायतों को वसूली के नियम बनाने होंगे
ग्रामीण इलाकों में अब ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। सिंगला ने कहा कि गांवों में भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए यूज़र चार्ज वसूला जाएगा। ग्राम पंचायतों को अपने नियमों में शुल्क वसूली का प्रावधान शामिल करना होगा।
पंचायतों की जिम्मेदारी होगी कि घरों, दुकानों, संस्थानों और अन्य प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे का डोर-टू-डोर कलेक्शन कराया जाए। साथ ही कचरे को घर से ही गीले और सूखे हिस्से में अलग करवाने, उसके सही निपटारे और वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेसिंग की व्यवस्था करनी होगी।गीला कचरा अलग, सूखा कचरा अलग—अब गांवों में भी यही होगा नया नियम!
खुले में कचरा जलाया तो बढ़ सकती है परेशानी! गांवों में सफाई व्यवस्था पर फोकस
सरकार ने ग्रामीण इलाकों में खुले में कचरा फेंकने और जलाने की समस्या को रोकने पर जोर दिया है। सड़कों, नालियों, जलाशयों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा जमा होने से पर्यावरण और स्वच्छता दोनों प्रभावित होते हैं।
इसी को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।सिंगला ने केंद्र से अतिरिक्त फंड की मांग की है, ताकि गांवों में कचरे के निपटारे की व्यवस्था बेहतर हो सके।
हर घर बनेगा कचरा प्रबंधन का केंद्र! छात्रों को मिलेगी ‘हाउसहोल्ड सुपरवाइज़र’ की जिम्मेदारी
शहरों और घरों में कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए अब शिक्षा विभाग और छात्रों को भी अभियान से जोड़ा जा रहा है। पाठ्यक्रम में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े थ्योरी और प्रैक्टिकल मॉड्यूल शामिल किए जाएंगे। वहीं छात्रों को ‘हाउसहोल्ड सुपरवाइज़र’ के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।
इन छात्रों की जिम्मेदारी होगी कि वे अपने परिवारों को घर में ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने के लिए जागरूक करें।
यानी अब सफाई का पाठ सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छात्र इसे अपने घरों तक लेकर जाएंगे।
हिमाचल प्रदेश में लागू किए गए नए नियम अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेंगे। सरकार ने इनके पालन की निगरानी के लिए राज्य से लेकर जिला स्तर तक समितियों का गठन किया है। इन समितियों की जिम्मेदारी नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करवाने की होगी।



















