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नूरपुर में MGNREGA से दुकान आवंटन तक उठे सवाल, प्रशासन ने शुरू की जांच

नूरपुर । राजवीर दीक्षित

(Questions raised in Nurpur regarding everything from MGNREGA to shop allotments; administration initiates an inquiry) कमनाला ग्राम पंचायत में MGNREGA के तहत किए गए कार्यों को लेकर अब विभाग ने जांच का शिकंजा कस दिया है। आरोप हैं कि इन कार्यों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की सप्लाई में कथित अनियमितताएं हुईं। मामला यहीं नहीं रुकता, बल्कि जस्सूर में नूरपुर पंचायत समिति की दुकानों के कथित अनधिकृत आवंटन की भी जांच की जाएगी। यानी पंचायत में विकास कार्यों से लेकर दुकानों के आवंटन तक, कई सवाल अब जांच की मेज पर हैं। ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग ने इन आरोपों की तह तक जाने के लिए 11 सितंबर को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। नूरपुर के सब-डिविजनल ऑफिसर विजय पंजला की अध्यक्षता में समिति ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है। समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसके बाद जांच के नतीजों से कई अहम सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।

शिकायत हुई, जांच के आदेश हुए और अब बारी है मौके पर पड़ताल की।

नूरपुर की कमनाला ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों को लेकर उठी शिकायत के बाद प्रशासन ने जांच कमेटी गठित की है। BDO अशोक कुमार के अनुसार, 10 सितंबर को सोशल एक्टिविस्ट अकील बख्शी की शिकायत के बाद यह कदम उठाया गया।

अब 26 सितंबर को जांच टीम पंचायत का दौरा करेगी। मनरेगा के रिकॉर्ड हासिल करने के साथ मौके पर जाकर कार्यों की वास्तविक स्थिति भी जांची जाएगी। कमेटी को निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

मनरेगा के निर्माण कार्यों में ‘खेल’ का आरोप! कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष का नाम सामने आया

कमनाला ग्राम पंचायत में मनरेगा के कामों को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। आरोप है कि निर्माण कार्यों के लिए जरूरी कच्चे माल की बिक्री और सप्लाई की व्यवस्था में कथित तौर पर अनियमितताएं हुईं। ‘रणजीत बख्शी जनकल्याण फाउंडेशन’ के प्रमुख रणजीत बख्शी ने इन आरोपों को उठाते हुए नूरपुर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष संदेश डडवाल की कथित भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।

शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन, जांच कमेटी गठित

10 सितंबर को बख्शी ने स्थानीय SDM को लिखित शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच 15 दिनों के भीतर कराने की मांग की थी। उन्होंने साफ चेतावनी दी थी कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हुई, तो FIR दर्ज कराने की मांग की जाएगी। शिकायत की प्रतियां मुख्यमंत्री, राज्य विजिलेंस एवं एंटी-करप्शन ब्यूरो के निदेशक, कांगड़ा DC और नूरपुर BDO को भी भेजी गईं। शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 11 सितंबर को जांच समिति गठित करने का आदेश जारी कर दिया।
शिकायत के अगले ही दिन जांच कमेटी गठित किए जाने से मामले ने प्रशासनिक स्तर पर भी तूल पकड़ लिया है।

नूरपुर पंचायत समिति की दुकानों के आवंटन पर सवाल, प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप

बख्शी ने जस्सूर में नूरपुर पंचायत समिति की दुकानों के आवंटन में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि पंचायत समिति की संपत्ति को लीज़ पर देने से पहले अपेक्षित खुली नीलामी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई दुकानें राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों और सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों को आवंटित की गईं। साथ ही, कुछ दुकानों को कम किराए पर दिए जाने और बाद में अधिक किराए पर सबलेट किए जाने का भी दावा किया गया है।

उनके अनुसार, इस व्यवस्था से पंचायत समिति को संभावित राजस्व नुकसान हुआ।

रोज़गार योजना या रसूखदारों को फायदा?

पंचायत समिति ने जिन दुकानों का निर्माण बेरोजगारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से किया था, उन्हीं दुकानों के आवंटन पर अब सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ लाभार्थियों का चयन नियमों के मुताबिक नहीं हुआ और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों को कथित तौर पर लाभ मिला।

सरकारी कर्मचारी और परिवार के सदस्य भी बने लाभार्थी ? अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सवाल अहम है कि पंचायत समिति की इस योजना का वास्तविक लाभ आखिर किसे मिला?

आरोप तो सामने आ चुके हैं, लेकिन क्या इनमें सच्चाई है? इसका जवाब जांच समिति की रिपोर्ट देगी। जांच में खास तौर पर यह देखा जाएगा कि MGNREGA के काम निर्धारित प्रक्रिया के तहत पूरे हुए या नहीं, निर्माण सामग्री की सप्लाई में नियमों का पालन हुआ या नहीं और पंचायत समिति की दुकानों के आवंटन व सबलेटिंग में पारदर्शिता बरती गई या नहीं।

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