Home Legal छात्रों के प्रदर्शन पर CJI का बड़ा बयान!

छात्रों के प्रदर्शन पर CJI का बड़ा बयान!

पटना। टारगेट न्यूज नेटवर्क

(CJI’s major statement on students’ performance!) भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना उनका मौलिक अधिकार है। अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई करती है, तो न्यायपालिका छात्रों के अधिकारों की रक्षा करेगी।

पटना के चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (CNLU) में कानून के छात्रों से संवाद के दौरान CJI ने कॉलेजियम की गोपनीयता, छात्रों की बढ़ती फीस, स्कॉलरशिप और पहली पीढ़ी के वकीलों की आर्थिक चुनौतियों समेत कई मुद्दों पर जवाब दिए।

कॉलेजियम की गोपनीयता पर CJI ने दिया जवाब

एक छात्र ने सवाल किया कि कॉलेजियम में किसी नाम पर असहमति या नकारात्मक टिप्पणी दर्ज होने के बावजूद उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता।

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि ऐसी टिप्पणियों को सार्वजनिक करने से संबंधित व्यक्ति की गरिमा और प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि कॉलेजियम की प्रक्रिया में गोपनीयता बनाए रखने के पीछे व्यक्ति की प्रतिष्ठा की रक्षा भी एक अहम कारण है।

पहली पीढ़ी के वकीलों की मुश्किलों पर चर्चा

संवाद के दौरान छात्रों ने पहली पीढ़ी के वकीलों की आर्थिक चुनौतियों का मुद्दा भी उठाया। CJI ने Sarika Tyagi v. Union of India मामले का उल्लेख किया, जिसमें शुरुआती वर्षों में युवा वकीलों को आर्थिक सहायता देने के लिए एक प्रोफेशनल असिस्टेंस फंड जैसे तंत्र की जरूरत पर चर्चा हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी माना गया कि शुरुआती दौर में कई युवा और पहली पीढ़ी के वकीलों को आर्थिक असुरक्षा का सामना करना पड़ता है और इसके लिए सहायता व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।

बढ़ती फीस और स्कॉलरशिप का मुद्दा भी उठा

CNLU के छात्रों ने बढ़ती फीस और पर्याप्त स्कॉलरशिप नहीं मिलने की समस्या CJI के सामने रखी। विश्वविद्यालय से जुड़े कार्यक्रम में छात्रों के सवालों पर CJI ने इन चिंताओं पर ध्यान देने की बात कही।

नशे में फंसे बच्चों को अपराधी नहीं, मदद की जरूरत

इसके अलावा CJI सूर्यकांत ने बच्चों में बढ़ते नशे के खतरे और उनके पुनर्वास पर भी बात की। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या को केवल अपराध या स्वास्थ्य के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए।

नशे की चपेट में आने वाले बच्चों की पढ़ाई, परिवार, सामाजिक जीवन और भविष्य प्रभावित हो सकता है। ऐसे बच्चों को अपराधी मानने के बजाय उनके संरक्षण, उपचार और पुनर्वास पर ध्यान देना जरूरी है।

परिवार और स्कूल की भी बड़ी जिम्मेदारी

CJI ने कहा कि बच्चों को नशे से बचाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, स्कूल, शिक्षक और समाज को मिलकर काम करना होगा।

बच्चों के व्यवहार में होने वाले शुरुआती बदलावों को पहचानकर समय रहते उन्हें मदद उपलब्ध कराना जरूरी है।

पुनर्वास का मतलब सिर्फ नशा छुड़ाना नहीं

CJI के मुताबिक किसी बच्चे को नशे से दूर कर देना ही पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया नहीं है। उसे दोबारा शिक्षा, खेल, परिवार और समाज से जोड़ना भी जरूरी है।

इसके लिए चिकित्सकीय उपचार के साथ मानसिक स्वास्थ्य सहायता और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।

राज्यपाल ने तस्करी और संगठित अपराध का मुद्दा उठाया

कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने नशे की समस्या को सामाजिक चुनौती के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी संगठित अपराध और अवैध धन के नेटवर्क को बढ़ावा दे सकती है।

उन्होंने बच्चों और किशोरों को नशे के नेटवर्क से बचाने के लिए परिवार, समाज और प्रशासन के स्तर पर सतर्कता की जरूरत बताई।

एक तरफ छात्रों के अधिकार और न्यायिक संरक्षण पर CJI का संदेश, तो दूसरी तरफ बच्चों को नशे से बचाने और उनके पुनर्वास पर जोर—पटना में CJI का छात्रों से संवाद कई अहम मुद्दों पर केंद्रित रहा।

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