Home Himachal Pradesh हिमाचल में एंटी हेलगन विवाद गरमाया! हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

हिमाचल में एंटी हेलगन विवाद गरमाया! हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

शिमला । राजवीर दीक्षित

(Anti-hail gun controversy heats up in Himachal; High Court seeks response from the government) जुब्बल और कोटखाई में सरकारी और निजी एंटी हेलगन यानी ओलारोधक बंदूकों के इस्तेमाल पर हिमाचल हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। अदालत ने फिलहाल कम से कम एक साल तक इन गनों के इस्तेमाल पर रोक रखने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने यह आदेश जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
दरअसल, हाई कोर्ट के सामने दाखिल शिकायतों और रिपोर्ट में एंटी हेलगन के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे। शिकायत में कहा गया था कि जब एंटी हेलगन चलाई जाती हैं तो बादल दूसरे क्षेत्रों की तरफ चले जाते हैं। और अगर ऐसा होता है, तो इसका असर किन इलाकों पर पड़ता है?
शिकायतों के मुताबिक, साथ लगते पड़ोसी क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश के साथ ओलावृष्टि होने की आशंका रहती है। इससे वहां के बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
यानी एक इलाके में फसल बचाने की कोशिश कहीं दूसरे इलाके के बागवानों के लिए नुकसान का कारण तो नहीं बन रही?
इसी सवाल को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि जब तक इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक कम से कम एक साल के लिए एंटी हेलगन का इस्तेमाल रोक दिया जाए।
अदालत ने राज्य सरकार से खास तौर पर यह रिपोर्ट मांगी है कि एंटी हेलगन बंद करने के बाद आसपास के इलाकों, यानी देवरीघाट और बड़ौनघाट के नजदीक, क्या कोई लाभ हुआ है या नहीं।

मामले में उस समय और गंभीर सवाल खड़े हुए जब निदेशक बागवानी की ओर से दाखिल शपथपत्र में सामने आया कि जब हेल कंट्रोल सिस्टम को एक घंटे से ज्यादा समय तक चलाया गया, उस दौरान भारी बारिश दर्ज की गई।
अब अदालत के सामने सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ संयोग था या एंटी हेलगन के इस्तेमाल और बारिश के बीच कोई संबंध है?
हाई कोर्ट ने इन तथ्यों को देखते हुए माना कि एंटी हेलगन के कारण नुकसान होने की आशंका पूरी तरह निराधार नहीं है और उपलब्ध तथ्य इस आशंका को सच साबित करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

हालांकि, इस तकनीक पर अभी वैज्ञानिक अध्ययन भी चल रहा है। डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी एंटी हेलगन तकनीक का अध्ययन कर रहा है। लेकिन इस अध्ययन को पूरा होने में करीब चार साल का समय लगने की बात सामने आई है।

इसी वजह से हाई कोर्ट ने नौणी यूनिवर्सिटी को भी इस मामले में प्रतिवादी बनाया है। यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार के माध्यम से नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा गया है।

अदालत के सामने दाखिल शिकायत में दुनिया के दूसरे देशों में इस तकनीक के प्रभावों का भी हवाला दिया गया। इसमें मेक्सिको, रोमानिया और अन्य देशों में एंटी हेलगन के कथित दुष्प्रभावों का जिक्र किया गया।

अब हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह इन सभी अंतरराष्ट्रीय पहलुओं का अध्ययन करे, वहां एंटी हेलगन के प्रभावों से जुड़ी जानकारी जुटाए और कोर्ट में एक व्यापक और विस्तृत जवाब दाखिल करे।
फिलहाल हाई कोर्ट की रोक के बाद जुब्बल और कोटखाई में एंटी हेलगन का इस्तेमाल थम गया है। लेकिन असली तस्वीर वैज्ञानिक अध्ययन और सरकार की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही साफ होगी।

 

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