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13 कर्मचारियों को अचानक नौकरी से निकाला! नेरचौक मेडिकल कॉलेज में मचा हड़कंप, एक ने जहर निगला

मंडी । राजवीर दीक्षित

(13 employees abruptly fired! Uproar at Nerchowk Medical College; one person ingested poison) हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित लाल बहादुर शास्त्री राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नेरचौक में आउटसोर्स आधार पर सेवाएं दे रहे 13 वार्ड ब्वाय को अचानक ड्यूटी से हटाए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। लंबे समय से अस्पताल में सेवाएं दे रहे इन कर्मचारियों को अचानक काम से बाहर किए जाने के बाद उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। रोजगार छिनने से पैदा हुए गंभीर आर्थिक संकट और मानसिक तनाव का असर इतना गहरा हुआ कि एक कर्मचारी ने जहर निगलकर आत्महत्या का प्रयास कर दिया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया।

बताया जा रहा है कि अस्पताल में काफी समय से सेवाएं दे रहे 13 वार्ड ब्वाय को बिना किसी पूर्व ठोस व्यवस्था और पर्याप्त नोटिस के अचानक ड्यूटी से हटा दिया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि इस फैसले ने उनके परिवारों को सीधे आर्थिक संकट में धकेल दिया है। नौकरी ही उनकी आय का प्रमुख जरिया थी और अचानक रोजगार छिन जाने के बाद उनके सामने दो वक्त की रोटी जुटाने तक की चुनौती खड़ी हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों तक सेवाएं देने के बावजूद उनके भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई।

मामले में प्रभावित कर्मचारियों ने संबंधित आउटसोर्स ठेकेदार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि ठेकेदार की ओर से मनमानी और शोषण किया जा रहा है। अचानक नौकरी जाने और भविष्य पूरी तरह अनिश्चित नजर आने से कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। इसी मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानी के बीच वार्ड ब्वाय बलवंत सिंह ने खौफनाक कदम उठाते हुए जहर निगलकर आत्महत्या का प्रयास किया।

गनीमत रही कि बलवंत सिंह को समय रहते अस्पताल में ही उपचार मिल गया, जिससे उसकी जान बच गई। हालांकि इस घटना के बाद पीड़ित परिवार के साथ-साथ अन्य प्रभावित कर्मचारियों में भी भारी रोष देखने को मिल रहा है। उनका कहना है कि अगर समय रहते उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

घटना की सूचना मिलते ही बल्ह क्षेत्र के विधायक इंद्र सिंह गांधी तुरंत अस्पताल पहुंचे। उन्होंने पीड़ित कर्मचारी का कुशलक्षेम जाना और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। विधायक ने कर्मचारियों के रोजगार से जुड़े इस मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

वहीं, प्रभावित कर्मचारियों और उनके स्वजन ने प्रदेश सरकार तथा अस्पताल प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच करवाने की पुरजोर मांग की है। उनकी मांग है कि अचानक हटाए गए सभी 13 वार्ड ब्वाय को तुरंत प्रभाव से बहाल किया जाए और उनके रोजगार एवं भविष्य को सुरक्षित किया जाए।

पीड़ित कर्मचारियों और उनके परिवारों का कहना है कि यह सिर्फ नौकरी जाने का मामला नहीं है, बल्कि इससे उनके पूरे परिवारों की आर्थिक सुरक्षा प्रभावित हुई है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से जल्द से जल्द हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई और सभी 13 कर्मचारियों को बहाल नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

अब बड़ा सवाल यही है कि लंबे समय से अस्पताल में सेवाएं दे रहे इन कर्मचारियों को अचानक हटाने की नौबत क्यों आई? क्या उन्हें हटाने से पहले कोई वैकल्पिक व्यवस्था या उचित नोटिस दिया गया था? और क्या इस पूरे मामले में आउटसोर्स ठेकेदार की भूमिका की भी जांच होगी? फिलहाल, इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और प्रदेश सरकार की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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