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वीरभद्र सिंह को याद कर भावुक प्रतिभा सिंह, बोलीं- इतनी जल्दी भूलना हिमाचल का दुर्भाग्य

 शिमला । राजवीर दीक्षित

(Pratibha Singh gets emotional remembering Virbhadra Singh; says forgetting him so soon is Himachal’s misfortune) रोहड़ू की धरती को हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता वीरभद्र सिंह की राजनीतिक कर्मभूमि माना जाता है। लेकिन हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के रोहड़ू दौरे के बाद अब कांग्रेस के भीतर वीरभद्र सिंह की विरासत और उनके सम्मान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू बीते सप्ताह रोहड़ू के दौरे पर पहुंचे थे। हालांकि इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी एवं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रह चुकीं प्रतिभा सिंह मौजूद नहीं थीं। उनके बेटे और राज्य सरकार में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में नजर नहीं आए।

मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए रोहड़ू में जगह-जगह पोस्टर और बैनर लगाए गए थे, लेकिन इन पोस्टर-बैनरों में वीरभद्र सिंह की तस्वीर नजर नहीं आई। इतना ही नहीं, कार्यक्रम के दौरान भाषणों में भी वीरभद्र सिंह के नाम का जिक्र नहीं हुआ। यही बात अब प्रतिभा सिंह के दर्द का कारण बनी है।

मंगलवार को कांग्रेस नेता ईश्वर दत्त छवारू के निधन पर उनके परिवार से मिलने प्रतिभा सिंह रोहड़ू पहुंचीं। इस दौरान सर्किट हाउस में स्थानीय लोग और कांग्रेस कार्यकर्ता उनसे मिलने पहुंचे। इसी दौरान प्रतिभा सिंह ने बिना किसी नेता का नाम लिए मुख्यमंत्री के रोहड़ू कार्यक्रम और उसमें वीरभद्र सिंह की कथित अनदेखी पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

प्रतिभा सिंह ने कहा, “अभी वीरभद्र सिंह को गए साढ़े चार साल ही हुए हैं, इतनी जल्दी कैसे भुला दिया?” उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के बैनर और पोस्टरों में वीरभद्र सिंह की तस्वीर होनी चाहिए थी और भाषण में भी उनका नाम लिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि किसी वरिष्ठ नेता का नाम लेना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं होती, बल्कि यह उनके योगदान और राजनीतिक विरासत के प्रति सम्मान का प्रतीक होता है।

“नेता चले जाते हैं, लेकिन उनकी विरासत और उनके योगदान को भुलाया नहीं जाना चाहिए।”
प्रतिभा सिंह ने कहा कि अगर मंच से वीरभद्र सिंह का नाम लिया जाता तो इससे नई पीढ़ी को उनके योगदान, व्यक्तित्व और हिमाचल के लिए किए गए कार्यों के बारे में जानने और सीखने का अवसर मिलता। उन्होंने मंच पर मौजूद कांग्रेस नेताओं से भी कहा कि वह यह अपेक्षा करती हैं कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व नेतृत्व को उचित सम्मान दिया जाए।

उन्होंने इस दौरान सिरमौर का उदाहरण भी दिया। प्रतिभा सिंह ने कहा कि सिरमौर में किसी भी कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. वाईएस परमार का नाम लिए बिना नहीं होती। उन्होंने कहा कि डॉ. वाईएस परमार हिमाचल के लिए आदरणीय और पूजनीय शख्सियत हैं। उसी तरह वीरभद्र सिंह भी प्रदेश की राजनीति में एक सम्मानित व्यक्तित्व रहे हैं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं की विरासत को आगे बढ़ाना कांग्रेस की परंपरा रही है और पार्टी को अपने पुराने नेताओं के योगदान को याद रखना चाहिए।

प्रतिभा सिंह ने रोहड़ू कांग्रेस मंडल को लेकर भी तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर वीरभद्र सिंह की तस्वीर वाले पोस्टर-बैनर नहीं लगाए गए तो यह कार्यकर्ताओं और नेताओं की दूरदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “इन्होंने नहीं लगाई तो हम ही लगा देते।” प्रतिभा सिंह ने कहा कि अगर स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता वीरभद्र सिंह के 20 बैनर और पोस्टर भी लगा देते तो इससे लोगों को खुशी होती।

उन्होंने इस पूरे मामले में दूरदर्शिता और छोटी सोच जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी किया। उनका कहना था कि कांग्रेस की विचारधारा कभी ऐसी नहीं रही कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व नेतृत्व को भुला दिया जाए। उनके मुताबिक, पार्टी की मजबूती उसकी पुरानी विरासत और वरिष्ठ नेताओं के योगदान से ही बनी है।

प्रतिभा सिंह ने एनएसयूआई और युवा कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को पार्टी के इतिहास और वरिष्ठ नेताओं के योगदान से जोड़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के अध्यक्ष का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें भी वीरभद्र सिंह की तस्वीर वाले पोस्टर लगाने चाहिए थे।

प्रतिभा सिंह के इस बयान के बाद रोहड़ू की राजनीति में वीरभद्र सिंह की विरासत एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। सवाल अब सिर्फ पोस्टर और तस्वीर का नहीं है, बल्कि यह भी है कि कांग्रेस की अगली पीढ़ी अपने पुराने नेतृत्व और उसकी विरासत को किस तरह याद रखेगी।

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