चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(CBI reaches CM’s camp; raids conducted at multiple locations in Punjab in connection with a corruption case) पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में जांच का दायरा अब बढ़ गया है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI ने मामले की जांच अपने हाथ में लेते हुए कार्रवाई शुरू की है। हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर को CBI को कथित भ्रष्टाचार के आरोपों में आपराधिक मामला दर्ज कर जांच करने और दो महीने में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।
मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन समेत अन्य लोगों पर आरोप लगाए गए हैं। ED की ओर से पंजाब के DGP को भेजे गए पत्रों में कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी टेंडर, लाइसेंस और अन्य प्रशासनिक फैसलों को प्रभावित करने के आरोपों का उल्लेख किया गया था। हालांकि, ये सभी आरोप जांच के दायरे में हैं और अभी सिद्ध नहीं हुए हैं।
CM कैंप ऑफिस समेत कई जगह कार्रवाई
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार CBI की कार्रवाई चंडीगढ़ और पंजाब के अलग-अलग स्थानों तक पहुंची है। आपके दिए विवरण के मुताबिक, चंडीगढ़ के CM कैंप ऑफिस, मोहाली, संगरूर और अन्य स्थानों पर टीमें पहुंची हैं और दस्तावेजों व अन्य सामग्री की जांच की जा रही है।
मामले में नितिन गोहल को कथित बिचौलिये के तौर पर बताया गया है। ED के आरोपों के मुताबिक, वह सरकारी कामों में लाभ लेने की कोशिश करने वाले लोगों और OSD के बीच संपर्क का काम करता था। जांच में ट्रांसफर-पोस्टिंग, गोपनीय दस्तावेजों, आर्म्स लाइसेंस और सरकारी मंजूरियों से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ SC पहुंची सरकार
हाईकोर्ट के आदेश के बाद पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल कर CBI जांच को चुनौती दी है। मंगलवार को वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने तत्काल सुनवाई की मांग की, लेकिन CJI सूर्यकांत की अगुआई वाली पीठ ने उसी दिन सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि मामले को बुधवार या गुरुवार को सूचीबद्ध करने की कोशिश की जाएगी।
CM मान ने लगाया राजनीतिक बदले का आरोप
CBI कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया पर इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया और आरोप लगाया कि केंद्र की एजेंसियों का इस्तेमाल पंजाब सरकार को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है। दूसरी ओर, ED की ओर से लगाए गए आरोपों और हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर अब मामले की स्वतंत्र जांच CBI कर रही है।
CBI जांच का रास्ता कैसे खुला?
पंजाब में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने नवंबर 2020 में CBI की जनरल कंसेंट वापस ले ली थी। इसके बाद सामान्य तौर पर CBI को राज्य में जांच के लिए राज्य सरकार की सहमति की जरूरत होती है। लेकिन अदालत के आदेश के तहत CBI को जांच सौंपे जाने की स्थिति अलग है। इस मामले में हाईकोर्ट ने स्वयं CBI को आपराधिक मामला दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया है और पंजाब सरकार व पुलिस को जांच में सहयोग करने को कहा है।
अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और CBI की शुरुआती जांच पर हैं।















