चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(CBI probe into alleged corruption in Punjab CM’s office; orders issued for FIR against OSD) पंजाब में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंपते हुए FIR दर्ज करने और दो महीने के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की पीठ ने कहा कि याचिका में सामने रखी गई सामग्री को देखते हुए मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है। कोर्ट ने पंजाब पुलिस की अब तक की कार्रवाई पर असंतोष जताया।
कोर्ट ने पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस को CBI जांच में हरसंभव सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी।
CM के OSD पर लगे गंभीर आरोप
यह मामला एडवोकेट निखिल सर्राफ की ओर से दायर याचिका के बाद हाईकोर्ट पहुंचा। याचिका में आरोप लगाया गया कि ED ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े आरोपों को लेकर पंजाब के DGP को पत्र भेजे थे, लेकिन पुलिस की ओर से FIR दर्ज नहीं की गई।
ED के अनुसार, नितिन गोहल कथित तौर पर सरकार से लाभ लेने के इच्छुक लोगों और संबंधित प्रभावशाली लोगों के बीच बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था। आरोपों में ट्रांसफर-पोस्टिंग, गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच, हथियार लाइसेंस और अन्य सरकारी लाभ दिलाने जैसी बातें शामिल हैं।
हालांकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ED के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। नितिन गोहल ने भी आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि चैट और बातचीत को गलत संदर्भ में पेश किया गया।
ED के पत्र पर FIR नहीं, अब CBI के हाथ जांच
ED की ओर से पंजाब पुलिस को कई बार पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग किए जाने के बावजूद FIR दर्ज नहीं हुई। पुलिस ने सीधे केस दर्ज करने के बजाय ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन से कानूनी राय मांगी थी।
इसके बाद ED ने हाईकोर्ट का रुख किया। अगस्त में हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से जवाब मांगा और आरोपों को गंभीर बताते हुए ED के पत्र अदालत में पेश करने के निर्देश दिए। सितंबर में कोर्ट ने मामले पर फैसला सुरक्षित रखा था।
अब हाईकोर्ट ने CBI जांच का आदेश देकर मामले को नया मोड़ दे दिया है।
सरकार SC में देगी चुनौती
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा है कि सरकार हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। उन्होंने CBI के अधिकार क्षेत्र का मुद्दा भी उठाया।
दरअसल, पंजाब सरकार ने नवंबर 2020 में CBI की जनरल कंसेंट वापस ले ली थी। इसके बाद सामान्य परिस्थितियों में CBI जांच के लिए राज्य सरकार की सहमति की जरूरत होती है। हालांकि, हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के आदेश से शुरू होने वाली जांच के लिए ऐसी राज्य सरकार की अलग मंजूरी जरूरी नहीं होती।
दो महीने में रिपोर्ट, 7 दिसंबर को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब CBI को मामले में FIR दर्ज कर जांच आगे बढ़ानी होगी और दो महीने के भीतर जांच रिपोर्ट अदालत के सामने रखनी होगी। पंजाब सरकार और पुलिस को जांच एजेंसी को पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
अब इस मामले में CBI की एंट्री के बाद पंजाब की सियासत भी गरमाने के आसार हैं।


















