धर्मशाला । राजवीर दीक्षित
(BJP raises questions over Palampur election results, alleges flaws in the voter list) पालमपुर नगर निगम चुनाव को लेकर सियासी घमासान और तेज हो गया है। मंगलवार को बीजेपी प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने 2026 के पालमपुर नगर निगम चुनावों में इस्तेमाल की गई वोटर लिस्ट पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए बड़े पैमाने पर कथित गड़बड़ी और हेरफेर के आरोप लगाए। कपूर ने दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया 4,000 से ज्यादा अयोग्य, डुप्लीकेट और संदिग्ध एंट्रीज़ से प्रभावित हुई और वोटर लिस्ट में कुल 4,037 संदिग्ध वोट पाए गए हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कपूर ने दावा किया कि इन 4,037 संदिग्ध एंट्रीज़ में 1,627 कथित डुप्लीकेट वोटर शामिल हैं, जबकि करीब 2,450 ऐसी एंट्रीज़ हैं जिनमें EPIC नंबर या घर का नंबर उपलब्ध नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन एंट्रीज़ में प्रवासी मजदूरों, विदेशी नागरिकों और मृत व्यक्तियों के नाम भी शामिल होने का दावा किया गया है। कपूर के मुताबिक, नगर निगम की सीमा से बाहर रहने वाले कई लोगों को भी पालमपुर में मतदाता के तौर पर रजिस्टर किया गया, जबकि कथित तौर पर उनके नाम मूल वोटर लिस्ट से हटाए तक नहीं गए।
बीजेपी के इन आरोपों ने अब पालमपुर नगर निगम चुनाव की पूरी चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कपूर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ दस्तावेज और वोटर-लिस्ट से जुड़ा डेटा भी पेश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय कांग्रेस पदाधिकारियों से जुड़े कई लोगों के नाम अलग-अलग इलाकों में एक से ज्यादा बार दर्ज किए गए और कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति से जुड़े कथित तौर पर अलग-अलग EPIC नंबर भी सामने आए। बीजेपी प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि दूसरे राज्यों से आए प्रवासी मजदूरों और अस्थायी तौर पर काम करने वाले कैटरिंग स्टाफ के नाम तक पालमपुर नगर निगम की वोटर लिस्ट में शामिल किए गए।
कपूर ने 2021 में तैयार की गई वोटर लिस्ट की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि उस समय नई वोटर लिस्ट तैयार करते वक्त चुनाव कार्यालय के पास पर्याप्त रूप से उपलब्ध वोटर लिस्ट का इस्तेमाल नहीं किया गया और पुराने रिकॉर्ड की सही तरीके से जांच किए बिना ही नए नाम जोड़ दिए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी समर्थकों की ओर से वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने या सुधार से जुड़े दावे और आपत्तियां दी गई थीं, लेकिन उन पर उचित तरीके से कार्रवाई नहीं की गई।
मामला यहीं नहीं रुका। बीजेपी ने वोटर लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों और फॉर्म्स पर भी सवाल उठाए हैं।
त्रिलोक कपूर ने आरोप लगाया कि संदिग्ध एंट्रीज़ तैयार करने के लिए ‘फॉर्म-4’ के तहत दिए गए बयानों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया। उनका दावा है कि कुछ लोगों को वास्तविक निवासियों की सहमति के बिना उनके पतों पर मतदाता के तौर पर रजिस्टर कर दिया गया। कपूर ने कहा कि कुछ वार्डों में वास्तविक युवा मतदाताओं और लंबे समय से इलाके में रह रहे निवासियों के नाम वोटर लिस्ट से छूट गए, जबकि दूसरी जगहों से जुड़े लोगों के नाम कथित तौर पर पालमपुर की सूची में शामिल कर दिए गए।
बीजेपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि मौजूदा मतदाताओं के नाम कथित तौर पर एक सोची-समझी साजिश के तहत हटाए गए और उनकी जगह डुप्लीकेट नाम जोड़े गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि नॉमिनेशन प्रक्रिया के अंतिम चरण तक बीजेपी उम्मीदवारों को सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट उपलब्ध नहीं कराई गई, जबकि इस सूची में ऐसे कई नाम होने का आरोप है जिनके साथ न तो घर का नंबर था और न ही EPIC की पूरी जानकारी।
अब बीजेपी ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है।
त्रिलोक कपूर ने कथित वोटर लिस्ट हेरफेर की CBI जांच कराने, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और कथित तौर पर डुप्लीकेट EPIC कार्ड रखने वाले लोगों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने केवल पालमपुर नगर निगम ही नहीं, बल्कि विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के अलावा प्रदेश के सभी नगर निकायों में भी वोटर लिस्ट की विशेष गहन जांच यानी SIR कराने की मांग की।
कपूर ने कहा कि बीजेपी इस मुद्दे को लेकर पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने ऐलान किया कि पार्टी पालमपुर नगर निगम में कथित वोटर लिस्ट गड़बड़ी की जांच, मतदाता सूची में सुधार और नए चुनाव की मांग को लेकर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बीजेपी की ओर से लगाए गए ये आरोप जांच में कितने सही साबित होते हैं और अगर वोटर लिस्ट में वास्तव में इतनी बड़ी संख्या में अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी? फिलहाल आरोपों ने पालमपुर नगर निगम चुनाव को लेकर एक नई राजनीतिक बहस जरूर छेड़ दी है।


















