Home Himachal Pradesh वेतन के लिए तरसे ग्राम रोजगार सेवक, 4 महीने से भुगतान नहीं;...

वेतन के लिए तरसे ग्राम रोजगार सेवक, 4 महीने से भुगतान नहीं; सरकार को चेतावनी

नूरपुर । राजवीर दीक्षित

(Village Employment Assistants deprived of wages; no payment for four months; warning issued to the government) हिमाचल प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ ने राज्य सरकार के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। चार महीने से वेतन नहीं मिलने से परेशान ग्राम रोजगार सेवकों ने सरकार को सिर्फ एक महीने का अल्टीमेटम दिया है। संघ ने साफ कहा है कि अगर तय समय के भीतर उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा और VB-G RAM G योजना का बहिष्कार करने का फैसला लिया जा सकता है।

संगठन के राज्य अध्यक्ष शिवराज ठाकुर ने बुधवार को कहा कि ग्राम रोजगार सेवकों को पिछले चार महीनों से सैलरी नहीं मिली है। लंबे समय से वेतन अटके होने के कारण कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और इसका असर उनके परिवारों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी आर्थिक तंगी के साथ मानसिक तनाव भी झेल रहे हैं।

ठाकुर ने कहा कि ग्राम रोजगार सेवक कोई नए कर्मचारी नहीं हैं। करीब 18 वर्षों से वे ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और गांवों तक सरकारी योजनाओं को पहुंचाने से लेकर विकास कार्यों को जमीन पर लागू करने तक अहम भूमिका निभाते आए हैं। इसके बावजूद इतने लंबे अनुभव और सेवा अवधि के बाद भी उन्हें समय पर वेतन नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ग्राम रोजगार सेवकों को भरोसा दिलाया था कि उनकी रुकी हुई सैलरी राज्य सरकार के फंड से जारी की जाएगी। लेकिन अब कर्मचारी अपने बकाया वेतन का इंतजार कर रहे हैं और संगठन सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहा है।

वहीं विवाद सिर्फ वेतन तक सीमित नहीं है। ग्राम रोजगार सेवक संघ ने VB-G RAM G योजना के तहत जारी किए गए नए जॉइनिंग ऑर्डर का भी कड़ा विरोध किया है। ठाकुर ने कहा कि जिन कर्मचारियों ने लगभग 18 साल तक सेवा की है, उनसे दोबारा नए सिरे से जॉइनिंग करने के लिए कहना उनकी पिछली सेवा, अनुभव और योगदान को नजरअंदाज करने जैसा है।

संघ ने ग्राम रोजगार सेवकों के हित में पहले जारी किए गए, लेकिन बाद में रद्द किए गए सर्विस अधिकारों से जुड़े नोटिफिकेशन को भी दोबारा लागू करने की मांग की है। ठाकुर ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उन कर्मचारियों के नौकरी से जुड़े हितों और अधिकारों की रक्षा करे, जिन्होंने लगभग दो दशकों तक ग्रामीण विकास के लिए लगातार काम किया है।

इसके साथ ही संगठन ने ग्रामीण विकास विभाग में खाली पड़े पदों पर ग्राम रोजगार सेवकों को समायोजित करने की मांग भी उठाई है। संघ का कहना है कि वर्षों से काम कर रहे इन कर्मचारियों के अनुभव का इस्तेमाल विभाग की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है।

अब गेंद सरकार के पाले में है। ग्राम रोजगार सेवक संघ ने चेतावनी दी है कि अगर एक महीने के भीतर चार महीने की रुकी हुई सैलरी जारी नहीं की गई, नए जॉइनिंग ऑर्डर वापस नहीं लिए गए, पुराने सर्विस अधिकारों से जुड़े नोटिफिकेशन बहाल नहीं किए गए और कर्मचारियों के समायोजन पर फैसला नहीं हुआ, तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।

ठाकुर ने साफ चेतावनी दी कि आंदोलन के साथ-साथ राज्य में VB-G RAM G योजना का बहिष्कार भी किया जा सकता है। यानी चार महीने से रुकी सैलरी का मुद्दा अब सिर्फ भुगतान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कर्मचारियों के सेवा अधिकार, अनुभव और भविष्य की नौकरी से भी जुड़ गया है।

Translate »
error: Content is protected !!