नई दिल्ली। राजवीर दीक्षित
(Havoc of Super El Niño: Risk of 4.5 lakh deaths) दुनिया पर एक बड़े जलवायु संकट का खतरा मंडरा रहा है। प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र का तापमान सामान्य से 3.4 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा पहुंच गया है। मौसम विशेषज्ञ इसे बेहद ताकतवर अल नीनो बता रहे हैं। इसके चलते दुनिया के कई हिस्सों में भीषण गर्मी, सूखा और भारी बारिश जैसी स्थितियां बन सकती हैं।
शिकागो यूनिवर्सिटी की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के शोधकर्ताओं के अनुमान के मुताबिक, जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच इस अल नीनो के कारण दुनियाभर में करीब 4.51 लाख अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं।
दिसंबर में चरम पर पहुंच सकता है अल नीनो
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो इस साल दिसंबर में अपने चरम पर पहुंच सकता है। इसके प्रभाव से आने वाले महीनों में दुनिया के बड़े हिस्से में सामान्य से अधिक तापमान रहने की आशंका है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने भी बारिश के बदलते पैटर्न को लेकर चेतावनी दी है। इसके कारण कुछ क्षेत्रों में सूखे का संकट गहरा सकता है, जबकि दूसरे इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। WMO के अनुसार इसका प्रभाव 2027 के शुरुआती महीनों तक बने रहने की संभावना है।
गर्मी बढ़ी तो बीमारियों का खतरा
तापमान में असामान्य बढ़ोतरी से हीट स्ट्रोक और गर्मी से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। वहीं बारिश के पैटर्न में बदलाव से कई क्षेत्रों में पानी की कमी और बाढ़ दोनों जैसी विपरीत परिस्थितियां देखने को मिल सकती हैं।
भारत पर भी पड़ सकता है असर
अल नीनो का असर भारत के मौसम पर भी पड़ सकता है। इसके प्रभाव से मानसून कमजोर रहने की स्थिति में कई हिस्सों में बारिश की कमी और सूखे का खतरा बढ़ सकता है।
यूरोप में भी इस साल असामान्य गर्मी का असर देखने को मिला है। फ्रांस, स्पेन और ब्रिटेन के कई इलाकों में तापमान ने रिकॉर्ड स्तर छुआ। कम बारिश के कारण डेन्यूब, राइन और टेम्स जैसी प्रमुख नदियों के जलस्तर में भी गिरावट दर्ज किए जाने की बात सामने आई है।
आखिर अल नीनो होता क्या है?
अल नीनो सिर्फ समुद्र के गर्म होने का नाम नहीं है। यह प्रशांत महासागर में समुद्र और वायुमंडल के बीच होने वाली एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है।
सामान्य परिस्थितियों में प्रशांत महासागर की हवाएं गर्म पानी को इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया की ओर धकेलती हैं, जबकि दक्षिण अमेरिका के तट के पास समुद्र की गहराई से ठंडा पानी ऊपर आता रहता है।
अल नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इससे गर्म पानी पूर्व की ओर फैलने लगता है और प्रशांत महासागर का मध्य तथा पूर्वी हिस्सा असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। यही बदलाव दुनियाभर के तापमान, बारिश और मौसम के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।


















