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हिमाचल में मिड-डे मील वर्कर्स का प्रदर्शन, अपनी मांगों को लेकर उठाई आवाज

शिमला।राजवीर दीक्षित

हिमाचल प्रदेश में मिड-डे मील वर्कर्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को कई जिलों और ब्लॉकों में प्रदर्शन किया। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) से संबद्ध मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन के बैनर तले कर्मचारियों ने 10 महीने के वेतन को 12 महीनों में बांटकर देने की व्यवस्था का विरोध किया। उन्होंने पूरे 12 महीने का वेतन देने और अन्य मांगें पूरी करने की आवाज उठाई।

यूनियन की राज्य समिति के आह्वान पर हुए इन प्रदर्शनों के दौरान कर्मचारियों ने शिक्षा विभाग के निदेशक को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के समाधान की मांग की।

शिमला में मिड-डे मील वर्कर्स ने शिक्षा निदेशालय के बाहर धरना दिया। प्रदर्शन में CITU के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, राज्य कोषाध्यक्ष जगत राम, जिला कोषाध्यक्ष बलराम, जिला सचिव विवेक कश्यप और यूनियन की प्रदेश महासचिव शांति देवी सहित कई कर्मचारी शामिल हुए।

यूनियन का प्रतिनिधिमंडल शिक्षा निदेशक से मिलने पहुंचा, लेकिन उनकी अनुपस्थिति के कारण मुलाकात नहीं हो सकी। अब यूनियन ने आने वाले दिनों में बैठक का समय मांगा है।

यूनियन नेताओं ने कहा कि कर्मचारियों को 10 महीने का वेतन 12 महीनों में बांटकर दिया जा रहा है, जिससे हर महीने मिलने वाली राशि कम हो जाती है। उन्होंने इसे कर्मचारियों के साथ अन्याय बताया।

यूनियन ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की एकल और खंडपीठ के फैसलों को लागू करने की मांग की। नेताओं के अनुसार, इन फैसलों में मिड-डे मील वर्कर्स को 10 के बजाय 12 महीने का वेतन देने का पक्ष लिया गया है।

यूनियन नेताओं के मुताबिक, प्रदेश के सरकारी स्कूलों में करीब 21 हजार मिड-डे मील वर्कर्स बच्चों के लिए भोजन तैयार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को पूरे साल छुट्टियां नहीं मिलतीं और कई बार तीन महीने तक वेतन का इंतजार करना पड़ता है।

उन्होंने स्कूलों में कम से कम 25 विद्यार्थियों की शर्त पर भी आपत्ति जताई। यूनियन का कहना है कि विद्यार्थियों की संख्या निर्धारित सीमा से कम होने पर कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया जाता है।

यूनियन ने हरियाणा की तर्ज पर 7,000 रुपये मासिक मानदेय, आंगनवाड़ी वर्कर्स की तरह 20 दिन का वार्षिक अवकाश और सेवानिवृत्ति के बाद ग्रेच्युटी व पेंशन देने की मांग उठाई।

इसके अलावा कर्मचारियों ने मांग की कि:

  • हर महीने की पहली तारीख को पूरा वेतन एकमुश्त दिया जाए।

  • 25 विद्यार्थियों की अनिवार्य शर्त हटाई जाए।

  • मेडिकल जांच और आने-जाने का पूरा खर्च शिक्षा विभाग उठाए।

  • चुनाव के दौरान मतदान कर्मियों के लिए खाना बनाने पर अतिरिक्त भुगतान मिले।

  • मिड-डे मील योजना का विस्तार 12वीं कक्षा तक किया जाए।

  • कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने के लिए नीति बनाई जाए।

यूनियन ने स्कूल क्लस्टर योजना के तहत कर्मचारियों को नौकरी से हटाने पर रोक लगाने की मांग भी की। नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान मतदान दलों के लिए भोजन तैयार करवाया जाता है, लेकिन इसके बदले अतिरिक्त भुगतान नहीं मिलता। सेवानिवृत्ति के बाद ग्रेच्युटी और पेंशन की सुविधा नहीं होने पर भी नाराजगी जताई गई।

यूनियन ने सरकार से सभी मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की है। कर्मचारियों का कहना है कि बच्चों को भोजन उपलब्ध करवाने में अहम भूमिका निभाने वाले वर्कर्स को भी समय पर वेतन, नौकरी की सुरक्षा और सम्मानजनक सुविधाएं मिलनी चाहिए।

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