शिमला।राजवीर दीक्षित
हिमाचल प्रदेश में रियल एस्टेट नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले बिल्डरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) ने राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश जारी कर कहा है कि RERA की ओर से डिफॉल्टर घोषित किए गए डेवलपर्स की जमीन की खरीद-फरोख्त का पंजीकरण न किया जाए।
इस आदेश का उद्देश्य नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों पर शिकंजा कसना और उन्हें आगे संपत्ति के लेन-देन से रोकना है। जिला प्रशासन इन निर्देशों को संबंधित तहसीलों और राजस्व अधिकारियों तक पहुंचाएगा, ताकि जमीनी स्तर पर इनका पालन सुनिश्चित किया जा सके।
RERA के चेयरमैन आरडी धीमान के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में 300 से अधिक रियल एस्टेट डेवलपर्स को डिफॉल्टर के रूप में दर्ज किया गया है। इन बिल्डरों के खिलाफ कई तरह की अनियमितताओं को लेकर कार्रवाई की गई है।
इनमें अनिवार्य पंजीकरण के बिना प्लॉट बेचना, खरीदारों से किए गए वादे पूरे न करना और आवासीय परियोजनाओं में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध न करवाना शामिल है।
RERA के मुताबिक, कई डेवलपर्स ने प्लॉट बेचते समय सड़क, बिजली, पेयजल, सीवरेज और पार्किंग जैसी सुविधाएं देने का वादा किया था, लेकिन खरीदारों को ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई गईं।
नए निर्देशों के तहत जिला प्रशासन को ऐसा प्रभावी तंत्र तैयार करने को कहा गया है, जिससे डिफॉल्टर घोषित बिल्डरों की जमीन से जुड़े किसी भी लेन-देन का पंजीकरण रोका जा सके। इसका मकसद RERA के आदेशों को केवल सरकारी फाइलों तक सीमित रखने के बजाय जमीन पर लागू करना है।
इस फैसले को उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्होंने आवासीय प्लॉट और हाउसिंग प्रोजेक्ट में अपनी जीवनभर की कमाई निवेश की, लेकिन कथित तौर पर उन्हें वादे के मुताबिक सुविधाएं नहीं मिलीं।
RERA की इस कार्रवाई से नियमों का उल्लंघन करने वाले डेवलपर्स पर दबाव बढ़ने और रियल एस्टेट क्षेत्र में जवाबदेही सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
अब इस आदेश का वास्तविक असर जिला प्रशासन, तहसील और राजस्व अधिकारियों की निगरानी पर निर्भर करेगा। यदि निर्देशों को सख्ती से लागू किया गया तो डिफॉल्टर बिल्डरों के लिए जमीन की खरीद-फरोख्त करना मुश्किल हो सकता है और संपत्ति खरीदारों के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।