मंडी । राजवीर दीक्षित
(High Court keeps a close watch on illegal access points and encroachments; directs NHAI to submit a report) कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर सुरक्षा को ताक पर रखकर बनाए गए अवैध रास्तों और अतिक्रमण के खिलाफ हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। अदालत अब सिर्फ सरकारी आंकड़ों और कागजी कार्रवाई पर भरोसा नहीं करना चाहती, बल्कि यह जानना चाहती है कि जमीन पर वास्तव में कितना काम हुआ है।
मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ के समक्ष जनहित याचिका ‘मदन लाल बनाम भारत सरकार व अन्य’ पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई को मंडी जिला प्रशासन की ओर से पेश किए गए आंकड़ों की धरातल पर जांच करने के निर्देश दिए हैं। एनएचएआई को अगली सुनवाई के दौरान अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष दाखिल करनी होगी।
अब बात करते हैं मंडी प्रशासन की ओर से अदालत में दिए गए आंकड़ों की। मंडी के उपायुक्त की ओर से दाखिल हलफनामे के मुताबिक सुंदरनगर उपमंडल में कुल 117 अवैध रास्तों की पहचान की गई थी, जिनमें से 61 को हटा दिया गया है। वहीं, 43 अतिक्रमणों में से 23 को हटाने की कार्रवाई की जा चुकी है।
लेकिन तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है।
बल्ह क्षेत्र की बात करें तो यहां 47 अवैध रास्तों में से 30 हटाए जा चुके हैं, जबकि 21 अतिक्रमणों में से 12 पर कार्रवाई की गई है। इसके अलावा सदर क्षेत्र में 10 अवैध होर्डिंग और बोर्ड भी हटाए गए हैं।
लेकिन इसके बावजूद अतिक्रमण और अवैध रास्तों से जुड़े 51 मामले अभी भी कार्रवाई के दायरे में लंबित हैं। यानी प्रशासन की ओर से कार्रवाई के आंकड़े सामने रखे गए हैं, लेकिन बड़ी संख्या में मामले अभी भी बाकी हैं।
यही वजह है कि अब हाईकोर्ट की नजर सिर्फ आंकड़ों पर नहीं, बल्कि उन आंकड़ों की जमीनी सच्चाई पर है।
सुनवाई के दौरान एनएचएआई के वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को आश्वासन दिया कि फोरलेन की सड़क सुरक्षा को प्रभावित करने वाले सभी अवैध रास्तों और कब्जों को समयबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। इस संबंध में एनएचएआई की ओर से एक नया हलफनामा भी अदालत में पेश किया जाएगा।
वहीं अदालत ने एनएचएआई को एक अहम जिम्मेदारी देते हुए कहा है कि वह यह भी जांच कर रिपोर्ट दे कि मंडी के उपायुक्त की ओर से दाखिल शपथपत्र में दिए गए आंकड़े वास्तव में जमीनी हकीकत को सही तरीके से दर्शाते हैं या नहीं। मतलब साफ है—अब कागज पर कार्रवाई और जमीन पर कार्रवाई, दोनों का मिलान होगा।
उधर, सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि कुल्लू के उपायुक्त की ओर से भी आवश्यक शपथपत्र कार्यालय में प्रस्तुत कर दिया गया है।
अब इस पूरे मामले में अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी। ऐसे में अगली तारीख पर यह साफ हो सकता है कि कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर अवैध रास्तों और अतिक्रमण के खिलाफ हुई कार्रवाई वास्तव में जमीन पर कितनी प्रभावी रही है।



















