चंडीगढ़। राजवीर दीक्षित
(Married women and migrants face increased difficulties in Punjab SIRs) पंजाब में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने और विवरण दुरुस्त कराने की समयसीमा शनिवार को समाप्त हो रही है। इसी बीच राज्य के कई हिस्सों से मतदाताओं को दस्तावेज और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर दिक्कतों की शिकायतें मिल रही हैं। शादी के बाद नाम बदलने वाली महिलाएं, वैवाहिक विवाद से गुजर रहीं महिलाएं और दूसरे शहरों में रहने वाले प्रवासी मतदाता सबसे ज्यादा परेशानी में बताए जा रहे हैं।
शादी के बाद नाम बदलने वाली महिलाएं परेशान
कई महिलाओं का कहना है कि शादी के बाद नाम या उपनाम बदलने के कारण उनके पुराने और नए मतदाता रिकॉर्ड को जोड़ने में परेशानी आ रही है। कुछ मामलों में उन्हें पुराने वोट से जुड़ी जानकारी हटाकर नए सिरे से आवेदन करने की सलाह दी जा रही है।
ऐसे मामलों में 2003 की मतदाता सूची से जुड़े दस्तावेज और परिवार के पुराने रिकॉर्ड मांगे जा रहे हैं। जिन महिलाओं के पास ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, उनके लिए प्रक्रिया और मुश्किल हो रही है।
लुधियाना में चुनाव पर्यवेक्षक के तौर पर काम कर रहीं पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की डॉ. गीता के अनुसार, ऐसे कई मामले ‘नो मैपिंग’ श्रेणी में आ रहे हैं। इनमें मतदाता खुद या अपने पूर्वजों की 2003 की मतदाता सूची में मौजूदगी का प्रमाण नहीं दे पा रहे हैं।
वैवाहिक विवाद में फंसी महिलाओं की अलग मुश्किल
वैवाहिक विवाद झेल रहीं महिलाओं के सामने भी वोट बरकरार रखने की चुनौती है। कुछ महिलाओं के नाम मायके के पते से हट चुके हैं, जबकि ससुराल के पते पर सत्यापन के समय घर पर मौजूद नहीं मिलने के कारण उनका नाम दर्ज नहीं हो सका।
फगवाड़ा की सिल्की ने बताया कि वैवाहिक विवाद के चलते वह ससुराल में मौजूद नहीं थीं। अब मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए उन्हें चुनाव पर्यवेक्षक के पास जाना पड़ रहा है।
प्रवासियों से पुराने रिकॉर्ड मांगे जा रहे
दूसरे शहरों में नौकरी या कारोबार करने वाले प्रवासी मतदाताओं की भी शिकायत है कि केवल आधार कार्ड पर्याप्त नहीं माना जा रहा। उनसे पैतृक स्थान की पुरानी मतदाता सूची और निवास से जुड़े दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
हैबोवाल निवासी पंकज शर्मा और उनकी पत्नी निशा का दावा है कि उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। उनका कहना है कि परिवार का पुराना रिकॉर्ड नहीं मिलने की बात बताई गई, जिसके बाद वे दोबारा दस्तावेज जमा कराने के लिए चुनाव कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
BLO की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
कुछ मतदाताओं ने बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। कुछ लोगों ने पक्षपात के आरोप लगाए हैं, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसके अलावा मोबाइल नंबर में गलतियां, तकनीकी समस्याएं और ऑनलाइन आवेदन में आ रही दिक्कतों ने भी परेशानी बढ़ाई है। दूसरे शहरों में रहने वाले कई मतदाताओं को सत्यापन और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने के लिए अपने पैतृक गांव या शहर लौटना पड़ रहा है।
समयसीमा खत्म, अब आगे क्या?
SIR की समयसीमा समाप्त होने के साथ उन मतदाताओं की चिंता बढ़ गई है जिनके पास पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं या जिनके नाम, पते और पारिवारिक विवरण में बदलाव हुआ है। अब ऐसे मतदाताओं के लिए यह अहम होगा कि चुनाव प्रक्रिया में उनके दावे और दस्तावेज किस तरह जांचे जाते हैं और मतदाता सूची में उनका नाम किस आधार पर बरकरार रखा जाता है।



















