द टारगेट न्यूज़:
बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाने वाले लोगों की मानसिकता में अब बदलाव देखने को मिल रहा है। कई लोग धीरे-धीरे अपनी जड़ों यानी पंजाब वापस लौट रहे हैं। इसके पीछे विदेश में काम से असंतोष, वृद्ध हो रहे माता-पिता की देखभाल या बच्चों की परवरिश बेहतर माहौल में करने जैसी कई वजहें शामिल हैं। इन प्रवासियों ने पंजाब लौटकर डेयरी फार्मिंग के व्यवसाय को फिर से जीवंत करना शुरू किया है। जालंधर के पास शाहकोट के रहने वाले मनमीत सिंह तूर इसका एक प्रमुख उदाहरण हैं। मैकेनिकल इंजीनियर मनमीत 2016-17 में कनाडा गए थे और उनका बेटा वहां का नागरिक है। हालांकि, पिछले दो वर्षों से उनका पूरा ध्यान पंजाब में डेयरी फार्मिंग व्यवसाय पर है, जिसकी देखभाल उनके छोटे भाई करते हैं। दोनों भाइयों ने मिलकर अपने डेयरी फार्म में मवेशियों की संख्या 100 से बढ़ाकर 250 कर दी है। वर्तमान में इन मवेशियों से प्रतिदिन लगभग 1,500 लीटर दूध प्राप्त होता है, जो सर्दियों में और बढ़ जाता है। मनमीत साल में 6 से 8 महीने पंजाब में रहते हैं और बाकी समय कनाडा में बिताते हैं, लेकिन वहां रहने के दौरान भी उनका पूरा फोकस डेयरी फार्मिंग में नई तकनीकों और नवाचारों के माध्यम से विकास करने पर रहता है। इसी तरह, न्यूजीलैंड में दो दशक से अधिक का समय बिताने के बाद लखविंदर सिंह रजोआना भी अपनी जड़ों में लौट आए हैं। उन्होंने डेयरी फार्मिंग की शुरुआत की है और उनके पास 12-15 मवेशी हैं। लखविंदर अपने बुजुर्ग माता-पिता के पास रहना चाहते थे और अपनी दोनों बेटियों की परवरिश पंजाब के माहौल में करना चाहते थे। उनका कहना है कि न्यूजीलैंड की प्रणालियों की तुलना में यहां शुरुआती दौर में सरकारी विभागों, यातायात, प्रदूषण और मौसम से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में स्थितियां बेहतर हो जाएंगी। रारा साहिब के पास बुथारी गांव के मंजिंदर सिंह बुथारी भी 2009 में ऑस्ट्रेलिया चले गए थे और कोविड के बाद उन्हें अपनी जड़ों की अहमियत समझ आई, जिसके बाद वह 2023 में पंजाब लौट आए। अब उनके दोनों बच्चे यहीं पढ़ाई कर रहे हैं। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद उनका डेयरी फार्मिंग व्यवसाय धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और उनके पास अब 30 से अधिक मवेशी हैं। गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (GADVASU) से जुड़े प्रगतिशील डेयरी किसान डॉ. राजपाल सिंह ने बताया कि ऐसे कई उदाहरण सामने आ रहे हैं जहां लोग वापस आकर पारंपरिक खेती और डेयरी व्यवसाय को पुनर्जीवित कर रहे हैं। उनके अनुसार, ये लोग अपने अनुभवों से बताते हैं कि विदेश में जीवन जितना आसान दिखता है, वैसा होता नहीं है और यदि वही कड़ी मेहनत अपनी जमीन पर की जाए, तो बहुत अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।


















